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जांच में दोषी मिले ट्रैफिककर्मी, कार्रवाई की संस्तुति

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जांच में दोषी मिले ट्रैफिककर्मी, कार्रवाई की संस्तुति
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गाजियाबाद। रिश्वत न मिलने पर गढ़ के व्यापारियों को बदमाश बताकर फर्जी सूचना फ्लैश करने के आरोपी ट्रैफिककर्मी जांच में दोषी मिले हैं। इस संबंध में एसपी ग्रामीण ने जांच रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी है। एसएसपी का कहना है कि मसूरी में आईएमएस कॉलेज के सामने तैनात ट्रैफिक कर्मियों की मनमानी सामने आई थी। जांच रिपोर्ट का अध्ययन कर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गढ़ मुक्तेश्वर के मोहल्ला चौधरियान निवासी नाजिम, शाकिब, साहिक, कासिम और ताबिश कपड़ा व्यापारी हैं। पांचों व्यापारी रविवार सुबह दिल्ली से सामान लेने के लिए गढ़ से चले थे। मसूरी में एनएच-9 स्थित आईएमएस कॉलेज के सामने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने चेकिंग के नाम पर उन्हें रोक लिया। व्यापारियों के पास 2.32 लाख रुपये मिलने पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने व्यापारियों को जेल भेजने की धमकी देते हुए मामला निपटाने के नाम पर पर रिश्वत में 20 हजार रुपये मांगे। हालांकि, बाद में वह 12 हजार रुपये पर आ गए। आरोप है कि व्यापारियों ने रिश्वत देने से इंकार किया तो ट्रैफिक कर्मियों ने उन्हें संदिग्ध बदमाश बताते हुए कंट्रोल रूम और डेल्टा पर सूचना फ्लैश कर दी। इसके बाद मसूरी पुलिस उन्हें थाने ले गई और व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई व रुपये सीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इसी बीच मामला एसएसपी व एसपी ग्रामीण के पास पहुंचा तो पासा पलट गया। जांच में ट्रैफिक कर्मियों की भूमिका संदिग्ध देख एसएसपी ने एसपी ग्रामीण को मामले की जांच सौंपी। साथ ही व्यापारियों को उनकी रकम लौटाकर वापस भेज दिया गया।
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मनमानी के दोषी मिले ट्रैफिककर्मी
एसपी ग्रामीण ने सोमवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार कर एसएसपी को भेज दी। रिपोर्ट में ट्रैफि कर्मियों को मनमानी का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि व्यापारियों ने अपने बयान में ट्रैफिक कर्मियों पर रिश्वत मांगने का भी आरोप लगाया है। कुल मिलाकर ट्रैफिक कर्मियों द्वारा एक साथ कंट्रोल व डेल्टा पर फर्जी सूचना देना भी संदेहास्पद माना गया है। एसएसपी अमित पाठक का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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इनसेट......
नेम प्लेट नहीं लगाई या छिपाई तो खैर नहीं
जिन ट्रैफिक कर्मियों पर गढ़ के आरोपियों को फंसाने की कोशिश का आरोप लगा है, उन्होंने घटना के वक्त नेम प्लेट उल्टी की हुई थी। ताकि किसी को उनका नाम न पता लग सके। एसएसपी अमित पाठक का कहना है कि अगर सड़क पर ड्यूटी के दौरान किसी पुलिसकर्मी ने नेम प्लेट नहीं लगाई या नाम छिपाने की कोशिश की तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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