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अक्तूबर से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसन में शुरू होगी ओपीडी

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अक्तूबर से नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसन में शुरू होगी ओपीडी
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गाजियाबाद। जल्द ही लोगों को यूनानी पद्धति से जिले में चिकित्सा की सुविधा मिलने जा रही है। आयुष मंत्रालय की तरफ से एम्स की तर्ज पर हापुड़ रोड पर बनाए जा रहे 200 बेड के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसन में अक्तूबर से ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) शुरू होगी। उत्तर भारत के सबसे बड़े यूनानी इंस्टीट्यूट में शैक्षिक सत्र 2022-23 से छात्रों के प्रवेश की प्रक्रिया भी प्रारंभ होगी। जल्द ही मंत्रालय की तरफ से सीटों का निर्धारण किया जाना है, जिस पर बात चल रही है। आधुनिक सुविधाओं से लैस नेशनल इंस्टीट्यूट में अस्पताल के साथ फैकल्टी के लिए आवास और दो हॉस्टल भी बनाए जा रहे हैं। अब तक निर्माण का काम 90 फीसदी तक पूरा हो गया है। इसलिए ओपीडी शुरू करने को लेकर भी कवायद शुरू कर दी गई है।
280 करोड़ से बनाए जा रहे इंस्टीट्यूट का लाभ दिल्ली-एनसीआर के साथ ही पूरे पश्चिमी यूपी को सीधे तौर पर मिलेगा। मंत्रालय का अनुमान है कि प्रतिदिन दो से तीन हजार मरीजों की ओपीडी में देखा जा सकेगा। उसी को ध्यान में रखकर चिकित्सक व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती होगी। केंद्र सरकार की 10 एकड़ जमीन पर इंस्टीट्यूट का निर्माण कार्य सितंबर 2019 में प्रारंभ हुआ था। नियम के हिसाब से 24 महीने में पूरी बिल्डिंग बनकर तैयार होनी चाहिए, जिसको लेकर निर्माण एजेंसी ने काम भी तेज कर दिया है। अब मंत्रालय ने निर्माण एजेंसी के सामने स्पष्ट किया है कि सबसे पहले ओपीडी चलाई जानी है। इसलिए पहले ओपीडी वाला हिस्सा पूरा कर लिया जाए। एजेंसी ने भी दो महीने के अंदर ओपीडी ब्लॉक को तैयार करने का भरोसा दिया है।
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फैकल्टी व सीटों के निर्धारण पर मंत्रणा
इंस्टीट्यूट को चलाने के लिए कितनी फैकल्टी की आवश्यकता है और पहले चरण में कितने छात्रों का स्नातक व परास्नातक कोर्स में दाखिला दिया जाना है। उसके बाद पीएचडी कर सकेंगे। इसे लेकर मंत्रालय स्तर पर मंत्रणा चल रही है। आयुष मंत्रालय चाहता है कि पहले ओपीडी चलाने के लिए पर्याप्त फैकल्टी रख ली जाएं। इसके बाद छात्रों को प्रवेश से पहले जरूरत के हिसाब से अन्य स्टाफ के पद स्वीकृत कर तैनाती हो। बताया गया कि अगले डेढ़ महीने में फैकल्टी की नियुक्ति को लेकर नोटिफिकेशन जारी होगा। उसके बाद डेढ़ महीने में नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।
पांच ऑपरेशन थियेटर होंगे
इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग दो हिस्सों में विभाजित करके बनाई गई है। एक हिस्से में ओपीडी, जांच व मेडिकल स्टोर होगा। इसमें ही पांच ऑपरेशन थियेटर भी बनाए गए हैं, जिनमें ऑपरेशन की सुविधा होगी। इनमें चार बड़े और एक छोटा ऑपरेशन थियेटर बनाया जा रहा है। शुरूआत में सिर्फ ओपीडी की सुविधा होगी, लेकिन मार्च 2022 तक यानी शैक्षिक सत्र से पहले ऑपरेशन की सुविधा भी मरीजों को मिल सकेगी। उधर, बिल्डिंग के दूसरे हिस्से में क्लास रूम, लाइब्रेरी और लैब बनाई गई हैं।
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इन प्रमुख विशेषताएं
- बालक व बालिकाओं के लिए दो हॉस्टल हैं। प्रत्येक में 185-185 फ्लैट बने हैं।
- कैंप के अंदर ही 200 सीट की क्षमता वाला ऑडिटोरियम है।
- पांच मंजिला बिल्डिंग के बेसमेंट में 500 वाहनों की पार्किंग हो सकेगी।
- फैकल्टी के लिए अलग से आवासीय कैंपस की सुविधा दी गई है।
- पांच मंजिला बिल्डिंग के हर फ्लोर पर एक साथ 100 लोगों के बैठने की सुविधा।
- रिसर्च के लिए विशेष लैब, एक्यूप्रेसर रूम और फिजियोथैरेपी रूम भी होगा।
- सीटी स्कैन, एमआरआई, ब्लड बैंक जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
कोट
मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क में हूं। इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग का काम भी अंतिम दौर में हैं। अब बस फैकल्टी का चयन और शैक्षिक सत्र के लिए सीटों का निर्धारण होना है, जिसको लेकर मंत्रालय में मंत्रणा चल रही है। छात्रों के प्रवेश से पहले अक्तूबर में ओपीडी शुरू हो जाएगी। इसी दिशा में काम भी चल रहा है।
- जनरल वीके सिंह, केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राजमार्ग राज्यमंत्री एवं स्थानीय सांसद
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