18 दिन में तीन बार बदली शवों के कफन चोरी की जांच
गाजियाबाद। बागपत पुलिस द्वारा गत 9 मई को शवों से कफन चोरी करने की घटना का खुलासा कई जिलों की पुलिस के गले की फांस बन गया है। 18 दिन में मामले की जांच तीन बार बदल चुकी है। आरोपी पक्ष का आरोप है कि बागपत पुलिस ने उनके विरोधियों से मिलकर मनगढ़ंत कहानी बनाकर उन्हें देशभर में बदनाम किया है। बागपत पुलिस के खुलासे पर सवाल उठने के बाद मामले की जांच हापुड़ पुलिस को सौंपी गई, जिसमें नए तथ्य सामने आने पर आईजी ने अब प्रकरण की जांच गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को सौंपी है। जांच के लिए केस डायरी गाजियाबाद आ चुकी है। अब यहां की पुलिस बागपत पुलिस के खुलासे की प्रमाणिकता का खुलासा करेगी।
बागपत पुलिस ने गत 9 मई को शवों से कफन चुराने वाले गिरोह का खुलासा कर सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें नई मंडी बड़ौत निवासी प्रवीण कुमार जैन, उनका बेटा आशीष जैन उर्फ उदित जैन, भतीजे ऋषभ जैन के अलावा शबगा छपरौली निवासी श्रवण कुमार शर्मा, फूंस वाली मस्जिद के पीछे बड़ौत निवासी राजू शर्मा और शाहरुख खान तथा गुराना रोड बागपत निवासी बबलू शामिल थे। पुलिस का कहना था कि आरोपी रात में श्मशान घाट से कफन और दूसरे कपड़े चोरी करके ले आते थे। धुलाई कराने के बाद उन पर ग्वालियर कंपनी के स्टीकर व रिबन लगाकर उन्हें महंगे दामों में बेच देते थे। पुलिस का कहना था कि इनमें कई कफन कोरोना पॉजिटिव लोगों के होते थे।
यह माल हुआ था बरामद
बागपत पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 520 सफेद व पीली चादर, 127 कुर्ते. 140 कमीज, 34 धोती, 12 रंगीन गर्म शॉल, 52 रंग-बिरंगी धोती, तीन रिबन के पैकेट, 158 रिबन ग्वालियर, 122 स्टीकर ग्वालियर कंपनी के बरामद हुए थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की बड़ौत में कपड़ों की दुकान है।
12 मई को हापुड़ व 26 मई को गाजियाबाद पहुंची जांच
पुलिस ने कपड़ा कारोबारी प्रवीण जैन समेत सभी सा आरोपियों को जेल भेज दिया था। कारोबारी की पत्नी जयश्री ने गत 12 मई को एडीजी को प्रार्थनापत्र देकर बागपत पुलिस पर मनगढ़ंत कहानी रचने के आरोप लगाए थे। उन्होंने कई बिंदुओं पर पुलिस के खुलासे पर सवाल उठाते हुए न्याय की गुहार लगाई थी। एडीजी ने मामला आईजी के पास भेजा, जहां से अगले ही दिन मामले की जांच हापुड़ एएसपी सर्वेश मिश्रा को दे दी गई। हापुड़ एएसपी ने चार दिन में जांच रिपोर्ट आईजी ऑफिस में दाखिल कर दी। आईजी ने गत 26 मई को मामले की जांच गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को सौंपी है।
हापुड़ एएसपी की जांच में मिले जांच के नए तथ्य
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, हापुड़ एएसपी की जांच में बागपत पुलिस के खुलासे को लेकर कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनमें जांच की गुंजाइश बाकी है। बताया गया कि बागपत पुलिस ने खुलासे के दौरान जल्दबाजी की और कुछ बिंदुओं को स्पष्ट नहीं किया। इसी के चलते मामले की जांच अब गाजियाबाद क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
इन बिंदुओं पर जांच की गुहार
- हिंदू धर्म में मुर्दों पर डाले जाने वाले सफेद कपड़े को जला दिया जाता है। मुस्लिम समाज में भी कफन को कब्र में ही दफना देते हैं। कफन के अलावा अर्थी पर डाले गई चादरों व शॉल आदि जमादार या श्मशान आचार्य को दे दिया जाता है। उनके चोरी होने का सवाल ही नहीं है।
- किसी थानाक्षेत्र में कफन की चोरी का मामला दर्ज हुआ था या नहीं, पुलिस ने खुलासे में जिक्र नहीं किया।
- खुले में की गई चोरी में 380 की धारा नहीं लगती, जबकि इस मामले में पुलिस ने यह धारा लगाई।
- कोरोना संक्रमित शवों को अस्पताल से ही पैक करके अंतिम संस्कार को लाया जाता है। इस समय कोई कपड़ा अर्थी पर नहीं होता। ऐसे में कफन या चादर चोरी करकेकोई कोरोना महामारी कैसे फैला सकता है।
केस डायरी कब्जे में ली, अब दर्ज होंगे बयान
शवों से कफन चोरी के मामले की जांच क्राइम ब्रांच को मिली थी। इसके विवेचना का जिम्मा मुझे सौंपा गया है। बागपत पुलिस से केस डायरी ले ली गई है। सभी आरोपी जेल से जमानत पर छूट चुके हैं, लिहाजा कोई समयसीमा की बाध्यता नहीं है। शिकायतकर्ता पक्ष व पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
- दलीप सिंह बिष्ट, विवेचक/इंस्पेक्टर, गाजियाबाद क्राइम ब्रांच