घरों में पढ़ी नमाज, सामाजिक दूरी का दिया पैगाम
गाजियाबाद। ईद-उल-अजहा (बकरीद) की नमाज लोगों ने घरों में पढ़ी। त्योहार के मौके पर ऐसा कर लोगों ने सामाजिक दूरी का संदेश दिया। गले भले ही न मिले लेकिन दिलों की नजदीकी के साथ एक-दूसरे को बधाई दी। साथ ही यह पैगाम भी दिया कि कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना है। कोरोना को हराने के लिए लोगों के इससे प्रेरित होने और इसी तरह का व्यवहार करने की जरूरत है। जिले को कोरोना संक्रमण से निजात दिलाने की दुआ मांगी गई। लोगों ने वीडियो कॉल करके भी बधाई दी।
शहर काजी मशरुर अब्बासी ने बताया कि इस बार लोगों ने ईदगाह में नमाज पढ़ने की जगह घर में पढ़ी। हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की याद में ईद-उल-अजहा का त्योहार अकीदत के साथ नमाज पढ़कर मनाया गया। कोरोना महामारी के खात्मे और देश के अमन चैन की दुआ मांगी गई।
तीन दिनों तक मनाया जाएगा त्योहार
शहर काजी ने बताया कि यह त्योहार तीन दिनों तक मनाया जाएगा। अकीदतमंद अपनी सुविधा अनुसार तीन दिन कुर्बानी कर सकते हैं। ईदगाह में मास्क और सोशल डिस्टेंसिग के साथ नमाज पढ़ी गई। शहर के जिन मस्जिदों में नमाज पढ़ी गई, वहां पर कोविड गाइडलाइन का पालन किया गया।
रमजान के दो महीने बाद कुर्बानी का त्योहार बकरीद मनाया जाता
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक रमजान के दो महीने बाद कुर्बानी का त्योहार बकरीद मनाया जाता है। बकरीद के त्योहार को कुर्बानी के दिन के रूप में याद किया जाता है। इस धार्मिक प्रक्रिया को फर्ज-ए-कुर्बान कहा जाता है। इस खास मौके पर ईदगाहों और प्रमुख मस्जिदों में ईद-उल-अजहा की विशेष नमाज पढ़ी जाती है।