रोपवे प्रोजेक्ट : सर्वे पूरा, अगले सप्ताह रिपोर्ट पेश करेगी कंपनी
इन तीन रूटों पर बनना है रोपवे
1. नया बस अड्डा मेट्रो स्टेशन से पुराना रेलवे स्टेशन
2. वैशाली मेट्रो स्टेशन से नोएडा सेक्टर-62 तक
3. वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। शहीद स्थल मेट्रो स्टेशन से लेकर पुराना रेलवे स्टेशन तक रोपवे चलाने के लिए सर्वे पूरा हो गया है। प्राइवेट कंसलटेंट कंपनी सर्वे की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार अगले सप्ताह जीडीए अधिकारियों के समक्ष प्रजेंटेशन देंगे। प्रजेंटेशन सही रहा तो इसकी डीपीआर बनाने का काम शुरू होगा। जीडीए ने महानगर में तीन रूटों पर रोपवे चलाने की योजना बनाई थी। इनमें नया बस अड्डा (शहीद स्थल) मेट्रो स्टेशन से पुराना रेलवे स्टेशन, वैशाली मेट्रो स्टेशन से नोएडा सेक्टर-62 (इलेक्ट्रानिक सिटी) और वैशाली मेट्रो स्टेशन से मोहननगर मेट्रो स्टेशन के बीच रोपवे निर्माण का प्रस्ताव शामिल है।
शहर के तीन मेेट्रो स्टेशनों को रोपवे से जोड़ने की प्लानिंग की जा रही है। इसमें पहले चरण में पुराना रेलवे स्टेशन से शहीद स्थल मेट्रो स्टेशन तक रोपवे प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने की तैयारी है। इस प्रोजेक्ट पर मेट्रो प्रोजेक्ट से काफी कम महज 70 करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना है। जनवरी में जीडीए ने इस रूट पर रोपवे चलाने को फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक प्राइवेट कंसलटेंट कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि तीन माह में इस रिपोर्ट को तैयार करने का समय दिया गया था, लेकिन कोरोना के कारण सर्वे में देरी हुई। जीडीए के चीफ इंजीनियर विवेकानंद सिंह का कहना है कि सर्र्वे पूरा हो गया है। अगले सप्ताह प्राइवेट कंसलटेंट कंपनी फिजिबिलिटी रिपोर्ट का प्रजेंटेशन देगी। इसके बाद आगे की प्लानिंग की जाएगी।
क्षेत्रीय सांसद ने दिया था सुझाव
गाजियाबाद में रोपवे चलाने के लिए केंद्रीय मंत्री व क्षेत्रीय सांसद वीके सिंह ने जीडीए को सुझाव दिया था। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस प्रोजेक्ट पर लागत कम आती है और जाम से भी लोगों को निजात मिल जाएगी। उनके सुझाव के बाद जीडीए ने प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार कराने की शुरूआत की है।
नया बस अड्डा मेट्रो का विस्तार करने की भी थी योजना
शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था को बेहतर बनाए जाने के लिए नया बस अड्डा मेट्रो को विस्तार देकर पहले रेलवे स्टेशन और फिर लालकुआं तक ले जाने की भी योजना बनाई गई थी, लेकिन इस पर बड़ा बजट खर्च होगा। इसके बाद विकल्प के तौर पर रोपवे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को चुना गया है।