जिले में 28 स्वास्थ्य केंद्रों पर लटका ताला
गाजियाबाद। शहर और ग्रामीण क्षेत्र में आठ करोड़ से अधिक की लागत से तैयार किए गए स्वास्थ्य उपकेंद्र बदहाल हैं। 28 केंद्र ऐसे हैं जो जर्जर हो चुके हैं। ये केंद्र कई साल से बंद हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने भी निरीक्षण के बाद सभी स्वास्थ्य केंद्रों को सक्रिय करने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक एक भी शुरू नहीं हुआ है।
जिले में 118 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। इनमें से अधिकांश केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे स्थान पर हैं, जो आबादी से काफी दूर सुनसान क्षेत्रों में हैं। इस वजह से वहां आशा और एएनएम अकेले जाने में डरती हैं। कई जगहों पर एएनएम सामुदायिक भवन या आंगनबाड़ी केंद्र में टीकाकरण करती हैं।
छह केंद्रों पर अधिक परेशानी
जिले में 2007-08 में 101 स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाए गए थे। एक सेंटर तैयार करने में विभाग को एनआरएचएम मद से 6.90 लाख रुपये मिले थे। 2010-11 में 17 स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाए गए थे। तब एक सेंटर बनाने में 11 लाख रुपये खर्च हुए थे। सबसे अधिक परेशानी छह केंद्रों पर है। इनमें रजापुर में दौसा, मुरादनगर में सुहाना, मानकी, भूड़गढ़ी, मथुरापुर और लोनी में मीरपुर हिंदू शामिल है।
प्रधानों की मदद से हो रहा काम
सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता ने बताया कि पंचायती राज विभाग की मदद से ग्रामीण क्षेत्र में ग्राम प्रधान उप स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत और सुंदरीकरण करा रहे हैं। इसमें इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने से लेकर, गेट, खिड़कियां, दरवाजे लगाने और पुताई का काम किया जा रहा है। शहरी क्षेत्र में पार्षदों की मदद ली जाएगी। सीएमओ ने बताया कि कई केंद्र ऐसे हैं, जिन्हें मंत्री व विधायक गोद ले चुके हैं।
कुल स्वास्थ्य उपकेंद्र - 118
नगरीय क्षेत्र में - 26
जर्जर हो चुके केंद्र - 20
जिन पर स्टाफ नहीं - 27
बंद पड़े केंद्र - 28
स्वास्थ्य केंद्र पर डॉक्टर नियुक्त - 34