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मौत के सात साल बाद जिंदा दिखा दो करोड़ की संपत्ति का बैनामा किया

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मौत के सात साल बाद जिंदा दिखाकर मकान बेचा, फर्जी खाते से डेढ़ करोड़ निकाले
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गाजियाबाद। फर्जी दस्तावेजों से संपत्ति की खरीद-फरोख्त या बैंक से लोन लेने के मामले तो अक्सर सामने आते रहते हैं, लेकिन फर्जीवाड़े की इस कड़ी में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर प्रश्न चिह्न लगा दिया है। जालसाजों ने सात साल पहले मर चुके शख्स को जिंदा दिखाकर दो करोड़ रुपये के मकान का बैनामा कर दिया। इतना ही नहीं, बैंक से उक्त संपत्ति पर डेढ़ करोड़ रुपये का लोन भी ले लिया। उक्त मामले में यूपी पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी ने एसएसपी व एसपी सिटी को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। अधिकारियों ने सिहानी गेट पुलिस को जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
जे-57, गोविंदपुरम निवासी लल्लू सिंह मौर्य यूपी पुलिस के रिटायर्ड डीएसपी हैं। एसएसपी को दी शिकायत में उन्होंने कहा कि जीडीए द्वारा बसाए गए द्वितीय-सी नेहरू नगर में भवन संख्या-36 ए चरनजीत लाल बग्गा पुत्र रामलाल बग्गा के नाम अलॉट था। आठ जून 2007 को चरनजीत लाल बग्गा की मृत्यु हो गई थी, लेकिन उन्हें जिंदा दिखाकर 24 दिसंबर 2014 को उनकी संपत्ति की रजिस्ट्री तुराबनगर निवासी महिला के नाम कर दी गई। यह महिला संपत्तियों में फर्जीवाड़ा करने वाले व्यक्ति की मुंहबोली मां है।
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मंदिर के बाहर स्टॉल लगाने वाले को बनाया चरनजीत
रिटायर्ड डीएसपी का कहना है कि उन्होंने पड़ताल की तो पता चला कि त्रिलोकी नाथ नाम के व्यक्ति को चरनजीत लाल बग्गा दिखाकर रजिस्ट्री में फर्जीवाड़ा किया गया है। उक्त त्रिलोकी नाथ दूधेश्वरनाथ मंदिर पर जूते के स्टाल पर श्रद्धालुओं के जूते-चप्पल रखने व देने का काम करता है। आरोपियों ने त्रिलोकी नाथ को लालच देकर उसे फर्जीवाड़े में शामिल किया।
आखिर किस नियम से किया 64 लाख नगद भुगतान
लल्लू सिंह मौर्य का कहना है कि रजिस्ट्री का अवलोकन करने से ज्ञात हुआ है कि रजिस्ट्री के वक्त कंप्यूटराइज्ड गवाह के लिए गए अंगूठे के निशान तो हैं, लेकिन उनके कंप्यूटराइज्ड फोटो रजिस्ट्री पर नहीं हैं। इसी तरह रजिस्ट्री के वक्त महिला द्वारा 50 लाख रुपये का नगद भुगतान व 14 लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी का भुगतान किया गया। यह जांच का विषय है कि इतनी बड़ी रकम कहां से, किसके खाते से आई।
लोन लेने को रचा फर्जीवाड़ा, मृतक का बेटा रजिस्ट्री में गवाह
रिटायर्ड डीएसपी का कहना है कि रजिस्ट्री हुए करीब पांच साल हो चुकेहैं। लेकिन आज भी संपत्ति पर चरनजीत बग्गा का बेटा व उसका परिवार रह रहा है। आरोप है कि लोन लेने के लिए सारा फर्जीवाड़ा रचा गया। उसमें चरनजीत लाल बग्गा के बेटा भी शामिल था। क्योंकि, मृत बाप के नाम से हुई रजिस्ट्री में वह खुद गवाह बना है।
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लोन, फर्जी खाता और रकम निकासी, सब पांच दिन में
रिटायटर्ड डीएसपी लल्लू सिंह मौर्य का कहना है कि 20 दिसंबर 2014 को मृतक चरनजीत लाल बग्गा के नाम से पीएवबी की लोहामंडी शाखा में खाता खुलवाया गया। वहीं, संपत्ति खरीदने वाली महिला ने पीएनबी की आरएबी (रियल एस्टेट ब्रांच) से लिया। 22 दिसंबर को डीडी जारी हुआ। उसी दिन फर्जी खाते में डेढ़ करोड़ रुपये आ गए और उसी दिन चेक के जरिये खाते से रकम निकाल ली गई। 24 दिसमबर 2014 को मृतक को जिंदा दिखाकर रजिस्ट्री करा दी गई।
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