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दो दिन के अंदर उजड़ गई दुनिया

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दो दिन के अंदर उजड़ गई दुनिया ...
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गाजियाबाद। कोरोना ने बहुत से लोगों की पूरी जिंदगी उड़ा दी। हंसते खेलते परिवारों गम का माहौल है। वैशाली सेक्टर - 3 निवासी अक्षांश और अक्षिता के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। दो दिन के अंदर ईश्वर ने इसमें मां-बाप का साया छीन लिया। माता-पिता को कोरोना हुआ और एक दिन के अंतराल से दोनों की मौत हो गई। अक्षांश ने अमर उजाला के नंबर पर संपर्क किया और जानकारी दी कि उनके पिता एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे और मां सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं।
अक्षांश बताते हैं कि पिता गंभीर बालियान की 22 अप्रैल को कोरोना से मृत्यु हुई और ठीक दूसरे दिन 23 अप्रैल को मां को भी कोरोना ने छीन लिया। अक्षांश ने बताया कि उनकी उम्र 22 साल है वह इंजीनियरिंग कर रहे हैं और बहन अक्षिता 16 साल की है जो स्कूल में पढ़ती है। उनके परिवार में दादा हैं जो 95 वर्ष के हैं जो गांव मेंरहते हैं। इसके अलावा एक बुआ हैं जिनकी शादी हो चुकी है और बाकी कोई परिवार में नहीं है। हम दोनों भाई बहन वैशाली में अपने फ्लैट में रह रहे हैं। बीच-बीच में नाना-नानी हमें मिलने आ जाते हैं। क्योंकि अभी मामा भी बीमार हैं इसलिए वह यहां भी नहीं रह पा रहे हैं। बाकी खाली घर काटने को दौड़ता है। अब परिवार के पास कमाई का कोई साधन भी नहीं है। इससे दोनों के सामने पढ़ाई पूरी करने और घर चलाने की भी चुनौती है।
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बच्चों और परिजनों की मर्जी के बाद होगी निर्णय
जिला प्रशासन को अभी जिन बच्चों की जानकारी मिली है वह सभी बच्चे अपने-अपने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ रह रहे हैं। कई बच्चे अभी माता-पिता के चले जाने के बाद अभी सदमे से नहीं उबर पाए हैं। प्रशासन उन सभी परिवारों के साथ संपर्क में है। बच्चों के सदमे से निकलने के बाद उन बच्चों की मर्जी जानी जाएगी और परिवार वालों से भी पूछा जाएगा कि वह इन बच्चों को अपने साथ रखना चाहते हैं या फिर उन्हें प्रशासन अपनी देखरेख में रखेगा।
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जिला एवं बाल कल्याण विभाग को जिले में 14 बच्चों की सूचना मिली है। उनमें से अभी तक सबसे छोटी सात वर्ष की बच्ची है। इसके अलावा 17 वर्ष तक के बच्चे हैं जिनमें से कुछ अपने मामा-मामी और चाचा-चाची के पास रहे रहे हैं। कुछ अपने दादा-दादी या बुआ के पास चलेगए हैं। इन सभी बच्चों की जानकारी प्रशासन ने जुटाई है और इनसे बातचीत करने की कोशिश की जा रही है। बच्चों के सदमे से निकलने के बाद और बात करने की स्थिति में आने के बाद उन बच्चों की मर्जी पूछी जाएगी। साथ ही उनके रिश्तेदारों से भी मर्जी पूछी जाएगी कि उनका क्या निर्णय होगा। अगर रिश्तेदार उन बच्चों को अपने पास रखना चाहेंगे तो वह उनके पास रहेंगे। इसके अलावा छह साल से छोटे बच्चे जिनके कोई भी रिश्तेदार उनकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं तो उन बच्चों को बाल आश्रम में रखाजाएगा। डीपीओ विकास चंद्र ने बताया कि बाल आश्रम में रहने वाले बच्चों की शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, रहने खाने सभी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
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