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मटियाला गांव में प्रत्याशी एक साथ करते हैं प्रचार, साथ खाते हैं खाना

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मटियाला गांव में पंचायत चुनाव को लेकर चर्चा करते हुए लोग।
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मटियाला गांव में प्रत्याशी एक साथ करते हैं प्रचार, साथ खाते हैं खाना
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गाजियाबाद। रजापुर ब्लॉक का मटियाला गांव आपसी सौहार्द और भाईचारे की मिसाल है। पंचायत चुनाव में यहां पांच प्रत्याशी प्रधान पद के लिए मैदान में हैं। लेकिन खास बात ये है कि ये सभी प्रत्याशी एक साथ कर रहे प्रचार हैं यही नहीं, वह दोपहर और शाम का भोजन भी एक साथ ही करते हैं। इन प्रत्याशियों के पिता भी दिन में एक बार साथ बैठकर भोजन करते हैं। गांव के लोग भी सब की बराबर मदद कर रहे हैं। जो लोग सुबह एक प्रत्याशी के साथ प्रचार करते हैं, शाम को वही लोग दूसरे प्रत्याशी का प्रचार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव चार दिन का है। हम लोगों को जिंदगी भर साथ रहना है।
बुधवार दोपहर अमर उजाला की टीम मटियाला गांव पहुंची तो अजब सिंह, ब्रजपाल सिंह और ईश्वर प्रसाद एक साथ बैठकर भोजन कर रहे थे। गांव के चुनावी माहौल पर चर्चा शुरू हुई तो उन्होंने कहा कि हम तीनों के बेटे चुनाव मैदान में हैं। देखकर एक बार तो लगा कि मजाक कर रहे होंगे, लेकिन यह सच्चाई थी। वहां उनके अलावा अन्य लोग भी खाना खा रहे थे। सभी ने कहा, जो जीतेगा पूरा गांव उसके साथ खड़ा होकर गांव के विकास में सहयोग करेगा। ब्यूरो
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मेरा बेटा मनोज मलिक बीएसएफ में था। कई साल पहले नौकरी छोड़ दी। अब प्रधानी का चुनाव लड़ रहा है। यह गांव उन गांव के लिए मिसाल है, जहां चुनाव के दौरान छोटी-छोटी बातों पर लोगों की हत्या कर दी जाती है। हमारे यहां हत्या तो दूर, मारपीट और झगड़ा भी नहीं होता है। थाने में गांव का शायद ही कोई मुकदमा मिलेगा। हम सभी लोग भाई चारे के साथ चुनाव लड़ रहे हैं। -अजब सिंह, प्रत्याशी के पिता
हमें किसी की बुराई भलाई नहीं लेनी है। चुनाव चार दिन है, खत्म हो जाएगा। गांव के लोगों को जिंदगी भर एक साथ रहना है। यदि हम चुनाव के दौरान एक दूसरे से झगड़ा करेंगे तो कल को एक साथ खड़े नहीं हो पाएंगे। यही कारण है कि जितने भी प्रत्याशी हैं, हम एक दूसरे के घर जाकर खाना खाते हैं और उनसे चुनाव पर चर्चा करते हैं। सभी एक दूसरे को वही आदर-सम्मान भी देते हैं। मेरा बेटा अजय कुमार भी इसी भावना के साथ चुनाव लड़ रहा है। -ब्रजपाल सिंह, प्रत्याशी के पिता
हम चुनाव में खाना ही साथ नहीं खा रहे हैं बल्कि दिल से भी एक दूसरे के साथ हैं, जिसकी किस्मत में प्रधानी लिखी होगी वह जीत जाएगा। गांव के लोग जिसको ज्यादा पसंद करते होंगे या उनको जो भी विकास कराने वाला लगता होगा, उसे मतदान करेंगे। मेरा बेटा कृष्ण चौधरी चुनाव लड़ रहा है, लेकिन वह अन्य प्रत्याशियों के साथ भी बैठ उठ रहा है, जिससे चुनाव के बाद किसी के मन में एक दूसरे के प्रति गलत भावना न हो। -ईश्वर सिंह, प्रत्याशी के पिता
हमारे गांव में हमेशा प्यार बना रहा है। मैं 1983 में बीडीसी का चुनाव लड़ा और लोगों के प्यार ने मुझे ब्लाक प्रमुख भी बना दिया। मैंने उस चुनाव में कोई पैसा भी खर्च नहीं किया था। गांव के लोग मेरे साथ लगे रहे और अन्य गांव के लोगों ने भी मुझे सपोर्ट किया। उस दौर में हम पैदल चुनाव प्रचार करने के लिए जाते थे। आज का चुनाव ऐसा नहीं रहा है। सूचना मिलती रहती है कि उस गांव में झगड़ा हो गया हैं, वहां हत्या कर दी है, लेकिन हमारे गांव के वहीं संस्कार आज भी जिंदा हैं।
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-दुर्गा प्रसाद, गांव मटियाला, पूर्व ब्लाक प्रमुख रजापुर
सामान्य में सीट आने के बाद भी नहीं लड़ा चुनाव
गांव निवासी सुंदर लाल ने बताया कि आज के दौर में ऐसा गांव नहीं मिल सकता है। आरक्षण से पहले ओबीसी में सीट आने की संभावना थी। ओबीसी के पांच लोगों ने काफी पहले से तैयारी शुरू कर दी। उनका पैसा भी खर्च हो रहा था। आरक्षण में फिर से सीट सामान्य हो गई, लेकिन सामान्य जाति का कोई प्रत्याशी मैदान में नहीं उतरा। उन्होंने कह दिया कि जो लोग पहले से तैयारी कर रहे हैं, वही चुनाव लड़ेंगे। जबकि अन्य गांव में इसके लिए मारामारी मची हुई है।
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