फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

योगी सरकार ने एक रुपये भी नहीं बढ़ाया गन्ना का दाम - राकेश टिकैत

विज्ञापन
बच्चों को पढ़ाते राकेश टिकैत। - फोटो : GHAZIABAD City
विज्ञापन
योगी सरकार ने एक रुपये भी नहीं बढ़ाया गन्ने का दाम : राकेश टिकैत
विज्ञापन

साहिबाबाद। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का आरोप है कि जब से भाजपा की सरकार आई है, प्रदेश में गन्ने का रेट नहीं बढ़ा है। टिकैत ने कहा कि मायावती सरकार में गन्ने पर चालीस रुपये बढ़े थे। अखिलेश सरकार में भी चालीस रुपये बढ़े लेकिन योगी सरकार में एक भी रुपया नहीं बढ़ा। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने रेट बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया।
सोमवार को यूपी गेट आंदोलन में मंच से किसानों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि योगी सरकार को अखिलेश और मायावती से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए थी। कम से कम पचास रुपये रेट बढ़ाने चाहिए थे। अगले साल फिर कुछ रेट बढ़ा देते तो किसान कहता कि मुख्यमंत्री बहुत ही बढ़िया हैं लेकिन मुख्यमंत्री ने ऐसा कुछ नहीं किया। बल्कि उन्होंने तो पिछला जो गन्ने का भुगतान है वह भी अभी तक किसानों को नहीं दिया। उन्होंने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार के रवैये से यह लग रहा है कि सरकार आंदोलन को लंबा लेकर जाएगी। सरकार का टारगेट यह है कि आंदोलन दो-तीन महीने में अपने आप खत्म हो जाएगा, लोग घर चले जाएंगे। आंदोलन में संख्या कम होने का मतलब सरकार यह समझ रही है कि आंदोलन धीरे-धीरे सिमट रहा है। लेकिन सरकार गलतफहमी में बिल्कुल मत रहे। जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं होगी किसान घर नहीं जाएगा। यह आंदोलन जारी रहेगा। राकेश टिकैत ने कहा कि उन्होंने सरकार से कहा कि रास्ता निकल सके तो किसानों से बातचीत कर लें लेकिन सरकार बातचीत नहीं कर रही। सरकार को बातचीत नहीं करनी तो हम भी पूरे देश में जाकर आंदोलन को मजबूत करना चाह रहे हैं लेकिन सरकार कुछ न कुछ बहाने बनाकर हमें रोक रही है। हम बंगाल जा रहे हैं तो कह रहे वहां चुनाव है। उत्तर प्रदेश में जा रहे तो वहां पर 2022 में चुनाव की बात कही जा रही है। हम कहीं गुजरात में जाएं तो कह रहे गुजरात में क्यों जा रहे हो। हम कहां जाएं यह सरकार हमको बता दे। सरकार कैसे मानेगी, वह रास्ता बता दे। टिकैत ने कहा कि हम कह रहे हैं कि तीनों कानून वापस ले लो। एमएसपी पर गारंटी दे दो क्योंकि असम के किसान को भी धान का रेट चाहिए। जो हमारी 23 फसलें हैं उन्हें डिजिटल इंडिया कैंपेन से जोड़ दिया जाए। जैसे हम तेल डलवाते हैं तो कार्ड देकर पैसा कटते हैं, उसी तरह फसलों के बेचते ही हमारे एकाउंट में पैसा आ जाए।
विज्ञापन

देश में बढ़ रही महंगाई
राकेश टिकैत ने कहा कि यह किसान बचाने का आंदोलन है। सरसों के तेल की खेती करने वाले किसानों को सरसों का रेट तो नहीं मिला लेकिन सरसों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने सरकार को महंगाई की सरकार बताया। कहा कि सरकार की गलत नीतियों से देश बर्बादी की कगार पर है। सब चीज महंगी हो गई है। बीएमडब्ल्यू और ट्रैक्टर के टायर दोनों पर टैक्स बराबर हैं। पेट्रोल और डीजल के दाम आज कहां पहुंच गए हैं। बढ़ते दामों को रोकने के लिए सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है।
विज्ञापन

यह आंदोलन आम जनता का भी
टिकैत ने कहा कि सरकार आंदोलन करने वालों को आंदोलनजीवी कह रही है। उन्होंने कहा कि यह किसानों का ही आंदोलन नहीं है। यह देश की आम जनता का भी आंदोलन है। उन्होंने किसानों से अपील की कि आंदोलन से सभी को जोड़ें। उन्होंने कहा कि आंदोलन को आगे बढ़ाने लिए चंदा इकठ्ठा करें। मंदिर के नाम पर चंदा मांगा जा रहा है, हम आंदोलन के लिए आटा मांग रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें