उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का रास्ता खोजने की जरूरत : हरीश रावत
साहिबाबाद। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत रविवार देर शाम यूपी गेट पर किसानों से दूसरी बार मुलाकात करने पहुंचे। वह अपने साथ मिट्टी और गंगाजल कलश में भरकर लाए। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि वह कील लगाने का काम करती है। लेकिन जो लोग फूल और पौधे लगाते हैं वो यहां आंदोलन कर रहे हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने सरकार पर किसानों को बांटने का आरोप लगाया। वहीं उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान का रास्ता खोजने की जरूरत है।
यहां आंदोलन स्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राजबीर जादौन, जगतार सिंह बाजवा, पवन खटाना समेत अन्य किसानों से आंदोलन की गति के बारे में वार्ता की।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाएं आती हैं। लेकिन हमें यह देखना है कि उन आपदाओं से निपटने के लिए सरकार कितनी तैयार है। वर्ष 2013 में भी प्राकृतिक आपदा में राज्य का 70 प्रतिशत भाग डूब चुका था। उसमें काफी नुकसान हुआ जिसे हम सभी ने मिलकर उसका मुकाबला किया और फिर से नया उत्तराखंड उभरकर सामने आया। इस बार भी हम त्रासदी से उभरेंगे। मगर ऐसी त्रासदी से होने वाले नुकसान का रास्ता खोजा जाना चाहिए।