फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आठ साल में भी नॉर्दन पूरिफेरल रोड प्रोजेक्ट अधूरा

विज्ञापन
नॉर्दर्न पेरीफेरल रोड पर होता निर्माण। - फोटो : GHAZIABAD City
विज्ञापन
आठ साल में भी नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड प्रोजेक्ट अधूरा
विज्ञापन

गाजियाबाद। महानगरवासियों को जाम से बचाने के लिए 2005 में आउटर रिंग रोड का खाका खींचा गया। इसके अंतर्गत नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड (एनपीआर) का निर्माण होना था। इसके लिए सलाहकार फर्म की नियुक्ति भी हो गई लेकिन आठ साल तक इसकी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार नहीं हो सकी। 2013 में प्रोजेक्ट को मंजूरी तो मिल गई लेकिन अभी तक इसका 35 फीसदी काम भी पूरा नहीं हो पाया है। परिणाम ये हुआ कि प्रोजेक्ट की लागत 26 करोड़ बढ़कर 466.46 करोड़ हो गई।
2013 में प्रोजेक्ट की लागत 440 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 466.46 करोड़ हो गई है। अब तक पांच जीडीए उपाध्यक्ष के बदल जाने के बावजूद एनपीआर प्रोजेक्ट को गति नहीं मिल सकी है। एनपीआर प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए जीडीए ने 2019 में प्रोजेक्ट को बोर्ड बैठक में इसे फिर से पास करते हुए शासन को फंडिंग का प्रस्ताव भेजा था। 466.46 करोड़ की फंडिंग के प्रस्ताव को शासन में गए करीब दो साल बीतने वाले हैं, लेकिन अभी तक प्रस्ताव वहीं पर लटका हुआ है। ऐसे में लचर सरकारी व्यवस्था और फंडिंग की कमी के चलते शहरवासियों और महानगर से गुजरने वालों को राहत देने वाला एनपीआर प्रोजेक्ट पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतर सका है।
विज्ञापन

डासना से दिल्ली-मेरठ हाईवे के बीच 3.50 किमी रोड का निर्माण
एनएच-9 को दिल्ली-मेरठ हाइवे और फिर लोनी तक जोड़ने वाले नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड प्रोजेक्ट के पूरा होने का शहरवासियों को लंबे अरसे से इंतजार है। तीन चरणों में पूरे होने वाले इस प्रोजेक्ट पर करीब 466.46 करोड़ खर्च होने हैं। लेकिन प्रोजेक्ट की फंडिंग का प्रस्ताव शासन में लंबित है। शासन से फंडिंग नहीं मिलने के बावजूद जीडीए ने अपने फंड से एनएच-9 से दिल्ली-मेरठ हाईवे तक के 6.40 किमी एनपीआर प्रोजेक्ट में से 3.50 किमी रोड का निर्माण करा दिया है। एनएच-9 से दिल्ली-मेरठ हाईवे तक के 6.40 किमी एनपीआर प्रोजेक्ट के निर्माण पर 223.92 करोड़, जबकि दिल्ली-मेरठ हाईवे से लोनी की ओर 3.5 किमी एनपीआर रोड व 6.26 किमी लंबी राजनगर एक्सटेंशन आउटर रिंग रोड पर 242.54 करोड़ खर्च किए जाना है।
एनपीआर से हजारों लोगों को मिलेगी राहत
महानगर में बढ़ते वाहनों के दबाव और जाम को खत्म करने के उद्देश्य से नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। पहले एनएच-9 से दिल्ली-मेरठ हाईवे और फिर लोनी के टीला मोड़ तक जाने वाले प्रोजेक्ट से वाहन शहर में अंदर प्रवेश करने की जगह बाहर से ही दो हाईवे के साथ लोनी से दिल्ली तक जा सकते थे। अभी एनएच-9 से लोनी तक पहुंचने के लिए लगने वाला दो घंटे का समय घटकर 45 मिनट रह जाता। अगर प्रोजेक्ट समय से पूरा हो गया होता तो शहर की अंदरूनी सड़कों पर लगने वाले वाहनों के जाम से भी बचाव हो सकता था। एनएच-9 से आने वालों के साथ ही शहर के हजारों लोगों को इस रोड से फायदा होता।
विज्ञापन

शासन से फंड मिलने की जीडीए को है आस
जीडीए बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड के प्रोजेक्ट के लिए 466.46 करोड़ की फंडिंग का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। कोरोना काल के चलते शासन स्तर से बीते एक साल में एनपीआर सहित अन्य विकास से जुड़े प्रोजेक्टों पर कोई विचार नहीं किया गया। अब जीडीए अधिकारियों को शासन स्तर से प्रोजेक्ट के लिए फंड मिलने की संभावना जताई जा रही है। जीडीए अपने स्तर पर 3.50 किमी रोड बना चुका है। ऐसे में अगर यूपी सरकार के आने वाले बजट में एनपीआर के लिए बजट मिलता है तो प्रोजेक्ट को एक साल के अंदर पूरा किया जा सकेगा। जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड प्रोजेक्ट की फंडिंग का प्रस्ताव शासन में विचाराधीन है। प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलने के बावजूद प्राधिकरण ने अपने फंड से मधुबन बापूधाम योजना में 3.50 किमी नॉर्दर्न पेरिफेरल रोड का निर्माण किया है। शासन से प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य को और गति मिलेगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें