बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के वर्ष 2019 के सम्मान-पुरस्कारों पर निर्णय लेने के लिए गठित की गई पुरस्कार समिति की बैठक में डीएम रविन्द्र कुमार की पुस्तक ‘एवरेस्ट: सपनों की उड़ान: सिफर से शिखर तक’ को यात्रा-वृतान्त विधा के तहत ‘सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय पुरस्कार’ से पुरस्कृत किये जाने की घोषणा की गई है। डीएम रविन्द्र कुमार की उक्त पुस्तक पर पूर्व में भी राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा एक लाख रूपये की धनराशि का ‘अमृत लाल नागर पुरस्कार’ प्रदान किया जा चुका है। इस पुस्तक में उन्होंने अपनी एवरेस्ट यात्रा वर्णन करते हुए, युवाओं के सपनों को साकार करने की कुंजी ‘सकारात्मक मानसिक चित्रण’(एडवांस्ड पाॅजीटिव विजुलाइजेशन) प्रविधि के रूप में सुझाई गई है। बिहार के बेगूसराय जिले में जन्मे रविन्द्र कुमार आईएएस अधिकारी होने के साथ-साथ एक कुशल पर्वतारोही हैं, जोे एवरेस्ट चढ़ने वाले प्रथम और एकमात्र आईएएस अधिकारी होने के साथ ही चीन और नेपाल के रास्ते से दो बार माउण्ट एवरेस्ट फतह करने वाले चन्द भारतीयों में से एक हैं। डीएम ने हिन्दी एवं अंग्रेज़ी माध्यम में दो प्रेरणादायक पुस्तकें ‘एवरेस्ट: सपनों की उड़ान-सिफ़र से शिखर तक’ और ‘मेनी एवरेस्ट’ लिखी हैं। ‘माउण्ट एवरेस्ट - एक्सपीरियेंस द जर्नी’ नाम से काॅफी टेबल बुक भी प्रकाशित कराई गई है। इनके दो कविता संग्रह ‘आंतरिक अंतरिक्ष एवं स्वप्न यात्रा’ और ‘ललक’ प्रकाशित हो चुके हैं। साथ ही तीन अन्य कविता संग्रह ‘नई आॅंखें’, ‘इक्कीसवीं सीढ़ी’ और ‘दूसरी जंग’ प्रकाशनाधीन हैं।