हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर हड़ताल पर रहे अधिवक्ता
- प्रदेश में अधिवक्ताओं के उत्पीड़न पर मनाया विरोध दिवस
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। बार काउंसिल उत्तर प्रदेश एवं केंद्रीय संघर्ष समिति मेरठ के आवाह्न पर अधिवक्ता एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। इसस मुकदमे की पैरवी के आने वाले लोगों को तारीख लेकर वापस लौटना पड़ा। बार काउंसिल ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में अधिवक्ताओं पर हो रहे उत्पीड़न के विरोध में हड़ताल का आवाह्न किया था, जबकि संघर्ष समिति ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई कोर्ट की बेंच की मांग को लेकर हड़ताल की थी। शनिवार को बार एसोसिएशन के सचिव मनमोहन शर्मा के नेतृत्व में वकीलों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुनीश त्यागी ने बताया कि ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश में एडवोकेट एक्ट लागू किए जाने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच की मांग को लेकर वकील पिछले 40 वर्ष से संघर्ष करते आ रहे हैं। इसके बावजूद मांग पूरी नहीं की जा रही है। इस बार हाईकोर्ट बेंच हर हाल में लेकर रहेंगे। इसके लिए चाहे कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। बार एसोसिएशन के सचिव मनमोहन शर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में वकील जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। मनमोहन शर्मा ने कहा कि मेरठ में ओंकार सिंह और महोबा में मुकेश पाठक ने पुलिस उत्पीड़न के चलते आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा अन्य कई जनपदों में पुलिस ने वकीलों का उत्पीड़न करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। पुलिस प्रशासन की इस दबंगई से अधिवक्ता त्रस्त हैं। किसी भी हाल में दबंगई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शर्मा ने दोषी पुलिस कर्मियों व विधायक सहित सभी आरोपियों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही करने की मांग की। पीड़ित परिवार को एक - एक करोड़ का मुआवजा व उनके आश्रितों को सरकारी नौकरी दिलाए जाने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों ने राहुल कुमार, प्रमोद कुमार, विजेंदर त्यागी, अनु चौधरी, मनोज नागवंशी समेत अनेक अधिवक्ता मौजूद रहे।
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