गाजियाबाद विकास प्राधिकरण कार्यालय
- फोटो : Amar Ujala
सबहेडः छूट के साथ बकाया जमा करने का मौका, जीडीए ने एकमुश्त समाधान योजना का तेज किया प्रचार-प्रसार
- ट्विटर के साथ अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चलाया जा रहा अभियान
- योजना में आवेदन करने वालों का आंकड़ा 35 फ़ीसदी, शहर में है 8294 छोटे-बड़े बकाएदार
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। छूट के साथ बकाया जमा करने की सुविधा के लिए एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) में आवेदन की रफ्तार धीमी है। महानगर में जीडीए के छोटे-बड़े 8294 बकाएदार हैं। ओटीएस योजना को आए हुए कई माह बीतने के बावजूद आवेदन का आंकड़ा 35 फीसदी को पार नहीं कर सका है। ऐसे में डिफॉल्टर आवंटियों को छूट के साथ बकाया जमा करने के लिए ट्विटर सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म प्रेरित किया जा रहा है।
ओटीएस योजना के पहले चरण में बड़े बकाएदार आगे आए हैं, जबकि छोटे बकाएदारों की संख्या 80 फ़ीसदी से ज्यादा है। ऐसे में योजना का लाभ 50 लाख से कम के बकाएदारों को मिल सके, इसके लिए उन्हें जागरूक किया जा रहा है। प्राधिकरण की ओर से विभिन्न जोन की कॉलोनियों में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। जहां एकमुश्त समाधान योजना के बारे में उन्हें विस्तृत जानकारी दी जा रही है। लोगों का रुझान को देखते हुए ही शासन ने योजना में आवेदन की तिथि बढ़ाकर 31 दिसंबर तक कर दी थी। इसके बावजूद लोगों का रुझान कम होने के चलते अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए डिफॉल्टर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।दूसरे चरण में शहरवासियों को ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन आवेदन का भी मौका है।
पहले चरण में बड़े बकाएदारों के आगे आने से जीडीए को करीब 125 करोड़ की आय हुई थी। छोटे बकाएदारों की संख्या अधिक होने के चलते लोगों को योजना के बारे में सोशल मीडिया के साथ विभिन्न माध्यमों से फिर से प्रेरित किया जा रहा है। बता दें कि महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में 8294 छोटे-बड़े बकाएदारों पर 465 करोड़ बकाया है। इंदिरापुरम योजना में सर्वाधिक छोटे-बड़े बकाएदार हैं। संपत्ति अनुभाग की ओर से तैयार की गई बकाएदारों की सूची में इंदिरापुरम में 1624 बकाएदारों पर सर्वाधिक 190 करोड़ से अधिक बकाया है। मधुबन बापूधाम योजना में 418 बकाएदारों पर 91 करोड़ बकाया है। ऐसे में बकाएदारों को योजना का लाभ उठाने के लिए फिर से जागरूक किया जाएगा। जीडीए सचिव संतोष कुमार राय ने बताया कि बकायेदारों को छूट के साथ योजना का लाभ उठाने के लिए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों के जरिए जागरूक किया जा रहा है। ओटीएस संबंधी विभिन्न योजनाओं में शिविर भी लगाए जा रहे हैं।
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