वन विभाग की अनुमति के बाद जगदीश नगर में बरगद के 100 साल पुराने पेड़ को पूरी तरह से छांट दिया गया
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सबहेडः पर्यावरणविदों ने वन विभाग की पेड़ों को ट्रांसलोकेट करने की व्यवस्था पर उठाए सवाल, ट्रांसलोकेट पौधों की जानकारी और वर्तमान स्थिति का मांगा ब्यौरा
- पर्यावरणविद अकाश वशिष्ठ ने डाली आरटीआई, जगदीशपुर में 100 साल पुराने बरगद पेड़ को ट्रांसलोकेट करने के दावों पर फिर घेरा
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। नवयुग मार्केट के पास जगदीशपुर में वन विभाग की ओर से 100 साल पुराने बरगद के पेड़ को दूसरी जगह स्थानांतरित (ट्रांसलोकेट) करने के बहाने पहुंचाए गए नुकसान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। महानगर के पर्यावरणविदों ने वन विभाग के बड़े पौधों को ट्रांसलोकेट करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। पर्यावरणविद आकाश वशिष्ट ने वन विभाग की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा करते हुए उनसे आरटीआई के जरिए अब तक ट्रांसलोकेट किए गए पेड़ों की जानकारी और उनकी वर्तमान स्थिति का ब्यौरा मांगा है।
आरटीआई के जरिए उन्होंने बीते 10 सालों में किन-किन किस्मों के पेड़ों को ट्रांसलोकेट किया गया, उनकी वर्तमान लोकेशन और प्रक्रिया संबंधी दस्तावेजों का ब्यौरा मांगा है। साथ ही ऐसे पेड़ों के रखरखाव और विकास के लिए किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट भी मांगी है। पर्यावरणविद आकाश वशिष्ट ने कहा कि वन विभाग के पास बड़े पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसलोकेट करने के संसाधन नहीं है। सुविधा न होने के बावजूद ट्रांसलोकेट करने के बहाने जगदीशपुर में 100 साल पुराने बरगद के पेड़ को बर्बाद कर दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया चुनिंदा व्यापारियों और प्रतिष्ठानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। ऐसे में अब वन विभाग से अब तक ट्रांसलोकेट किए गए पौधों और उनकी वर्तमान स्थिति का पूरा ब्योरा मांगा गया है।
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