कोरोना को मात देने वाले लोगों के घरों में करवाचौथ है खास
- कहीं पत्नी बीमार पड़ी तो कहीं पति दोनों ने निभाया एक दूसरे का पूरा साथ
- दंपतियों ने कहा मौत के मुंह से निकलकर आए हैं, ईश्वर को दे रहे विशेष धन्यवाद
- एक दूसरे के साथ और प्रेम और ईश्वर पर विश्वास से ही बीमारी को मात देने की बात कही
निशा ठाकुर
साहिबाबाद। करवाचौथ का व्रत हर सुहागिन के लिए खास होता है। वहीं इस बार ऐसे लोगों के लिए यह व्रत और भी ज्यादा खास हो गया जिन्होंने कोविड संक्रमण को झेला है। ऐसे दंपतियों के लिए इस बार करवाचौथ के साथ ही सभी त्योहार खास हो गए हैं, उन्हें लगता है कि एक नई जिंदगी मिली है और इस जिंदगी में ढेरों खुशियां नए सिरे से बटोरनी है। ऐसी पत्नियां जिनके पति कोविड-19 के चपेट में आए और अब ठीक हैं , वह मुश्किल के वक्त को याद करते ही सहम उठती हैं, उनका कहना है कि दुआओं ने अपना रंग दिखाया और आज वह अपने साथी के साथ खुश हैं। ऐसे में इस बार की करवाचौथ इनके लिए खास मायने रखती है।
हर पल रही साथ ईश्वर ने बनाए रखा अपना आशीर्वाद
इंदिरापुरम की मंजू गुप्ता का कहना है कि उनके पति को शुरुआती दौर में ही यह संक्रमण हुआ। दिल्ली के एक अस्पताल में वह एडमिट हुए और करीब एक माह बाद घर लौटे। मंजू कहती हैं कि इस बीच मैंने पति का साथ पल भर के लिए भी नहीं छोड़ा था, चिकित्सकों के मना करने के बावजूद मैं पीपीई किट पहन कर उनसे मिलती,उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाती थी और हमेशा सकारात्मक बातें करती थी। उस बुरे दौर को याद करते हुए मंजू की आंखों में आंसू भर आए उन्होंने बताया कि जब पति एडमिट होने के लिए जा रहे थे तो उन्होंने कहा कि पता नहीं अब मैं लौटूंगा भी या नहीं लेकिन मेरा पूरा विश्वास ईश्वर में है और मैंने उन्हें यही कहा कि आप कुछ ही दिनों में हम सबके साथ होंगे। मंजू कहती हैं कि कपिल के ठीक होना बहुत बड़ी मन्नत का पूरा होना है और यह करवा चौथ वाकई उनके लिए बहुत खास है। नई जिंदगी मिली है उन्हें ऐसे में वह हर पल को इंज्वाय करती हैं और करवाचौथ की तैयारियों में अभी से जुट गई हैं।
नई जिंदगी मिली है, नए सिरे से खुशियों को करेंगे सेलिब्रेट
इंदिरापुरम की प्रियंका राणा का कहना है कि कोरोना से बचना मौत के मुंह से वापस लौट कर आने जैसा है। अब तक काफी बदल गया है लोग जागरूक भी हो गए हैं लेकिन जब उनके पति कोविड की चपेट में आए तो बहुत मुश्किल था हर वक्त। पंद्रह दिन तक अस्पताल में रहे, दिन रात हमेशा ईश्वर को ही मनाती रहती थी। दरअसल कभी रिपोर्ट नॉर्मल आती तो कभी निमोनिया और अन्य कांप्लीकेशन आ जाते हमेशा डर बना रहता था। इन सबके बीच सकारात्म्क सोच और विश्वास ने इस बीमारी से जीत दिलाने में मदद की। प्रियंका कहना है कि उनके पति डायबीटिक हैं तो दिक्कत इसलिए बढ़ गई थी लेकिन अब सब ठीक है, ऐसे में इस बार न केवल करवाचौथ बल्कि हर त्योहार उनके लिए खास मायने रखता है। पति की सलामती की दुआ काम आई कि आज उनके घर में हर ओर खुशियां हैं।
रिश्ते की डोर और हुई मजबूत
वसुंधरा निवासी सरिता का कहना है कि जून में उनके पति संजीत भी इसकी चपेट में आ गए थे। तब पीक टाइम चल रहा था कोविड-19 संक्रमण का ऐसे में जब चारो ओर से नकारात्म्क खबरें आती तो वह काफी सहम जाती थी। वहीं इन सबके बीच उन्होंने कभी भी अपने पति के सामने अपने मन का डर नहीं आने दिया, हमेशा एक विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ ही उनसे मिलती रहती। कोविड के दौर में जब लोग अपनी संवेदनाएं फोन पर ही जताते थे ऐसे में बहुत मुश्किल था सब कुछ संभाल पाना लेकिन हमारे प्रेम और विश्वास की जीत हुई। कोविड टाइम ने हमारे रिश्ते को और मजबूत और परिपक्व बना दिया है। ईश्वर पर विश्वास भी बढ़ गया है ऐसे में करवाचौथ इस बार खास मायने रखता है और हम लोग इस बार अपनी खुशियों को नए सिरे से सेलिब्रेट करने वाले हैं।
वक्त मुश्किल था जो कट गया अब हर दिन है खास
वसुंधरा निवासी आशा भाटी जो कि पार्षद भी है जनता सेवा के दौरान कोविड-19 की चपेट में आई थी। आशा कहती हैं कि मेरे अस्पताल में एडमिट होने के दो -तीन दिन बाद ही पति नरेश भाटी भी संक्रमित हो गए। ऐसे में दोनों को ही एक दूसरे की चिंता थी लेकिन उपचार के दौरान भी दोनों एक दूसरे का हौसला बढ़ाते रहे। आशा कहती हैं कि मुश्किल कोई भी जीवनसाथी का साथ रहे तो हर मुश्किल आसान हो जाती है। आशा कहती हैं कि कोरोना के वार से वह दोनों ही जीत गए ऐसे में करवाचौथ का व्रत उनके लिए खास हैं। ईश्वर का ही आशीर्वाद है कि दोनों का साथ बना हुआ है।
परिवार पर रहा ईश्वर का आशीर्वाद
इंदिरापुरम की अनीता कहती हैं कि उन्हें नई जिंदगी मिली है। दरअसल परिवार में उन्हें छोड़ कर पति और बच्चों को कोविड हो गया था। ऐसे में वह अकेली थी जो हर पल टूटती और बिखरती थी लेकिन उन्होंने ईश्वर में अपनी आस्था कभी नहीं छोड़ी। अनीता का कहना है कि पति के बाद जब बच्चे भी संक्रमण के चपेट में आए तो वह खुद बहुत घबरा गई थीं लेकिन परिवार के सामने कभी अपना दर्द जाहिर नहीं होने दिया, पल-पल बस दुआ करती रही जो रंग लाई। ऐसे में इस बार करवाचौथ से लेकर होई और दिवाली हर त्योहार ही उनके लिए खास हैं और ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करने के मौके। अनीता कहती है कि उन्होंने हर त्योहार की अभी से तैयारी में जुट गई हैं, इस बार सभी सेलीब्रेशन स्पेशल होंगे।
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