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कुमार विश्वास के घर के बाहर से चोरी मैनेजर की फाच्र्यूनर बरामद

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माई सिटी रिपोर्टर साहिबाबाद। कवि कुमार विश्वास के वसुंधरा सेक्टर तीन स्थित घर के बाहर से 14-15 फरवरी की रात को चोरी हुई मैनेजर की फाच्र्यूनर कार को इंदिरापुरम पुलिस ने बरामद कर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने गिरोह के पास से एक अन्य फाच्र्यूनर और स्विफ्ट, फर्जी नंबर प्लेट, इंजन और चेचिस नंबर बदलने के लिए डाई, पेंट आदि औजार बरामद किए हैं। आरोपी चोरी के वाहनों के कागजात तैयार कर बेचते थे। पुलिस गिरोह के फरार सरगना की तलाश कर रही है। आरोपी करीब पांच वर्षों से दो सौ से अधिक कार को बेच चुके हैं। सीओ इंदिरापुरम अंशु जैन ने बताया कि इंदिरापुरम पुलिस ने चोरी के लग्जरी वाहनों की चेचिस नंबर और इंजन नंबर बदलकर बेचने वाले गिरोह के चार बदमाशों को मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपी कामिल उर्फ आमिर निवासी शाहमीर गेट मेरठ, मोहम्मद काल्लू निवासी पंचाली बागपत रोड मेरठ, काला उर्फ आरिफ लिसाडी गेट मेरठ, नसीबो उर्फ नसीबुद्दीन निवासी भावनपुर मेरठ हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो फाच्र्यूनर और एक स्विफ्ट कार बरामद की है। साथ ही दो तमंचे, कारतूस, डाई मशीन, पलास, पेचकस, पाना समेत अन्य टूल, नंबर बदलने के लिए प्रयोग में आने वाला पेंट, और चार मोबाइल बरामद किए हैं। इन्हीं मोबाइल से आरोपी गिरोह में बात करते थे। जो फर्जी आईडी पर लिए गए थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि एक फाच्र्यूनर कार आरोपियों ने वसुंधरा सेक्टर तीन में १४-१५ फरवरी की रात को चोरी की थी। सीओ ने बताया कि वह कार कुमार विश्वास के घर के बाहर से उनके मैनेजर वरदान शर्मा की चोरी हुई थी। जिसका मुकदमा इंदिरापुरम थाने में लिखा गया है। आरोपियों के पास से बरामद कारों की कीमत करीब ७५ लाख रुपये बताई जा रही है। सरगना भेजता था आरसी, आरोपी बदलते थे नंबर पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि मोहम्मद कल्लू और नसीबुद्दीन अनपड़ हैं। जबकि कामिल दूसरी व काला पांचवीं पास है। सभी आरोपी सुक्का जो गिरोह का सरगना है उसके लिए काम करते हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सुक्का उनके व्हाट्सएप पर एक्सीडेंट, जली हुई कार, कबाड़ में कटने के लिए आई कार की आरसी भेजता था। साथ ही चोरी के वाहन भेजता था। यह आरोपी आरसी के आधार पर चोरी के वाहन पर चेचिस और इंजन नंबर बदल देते थे। इसके बाद उसकी नंबर प्लेट बनाते थे। इसके बाद उसक कार को दूसरे राज्यों में अच्छे दामों पर बेच देते थे। पांच वर्षों से कर रहे हैं काम पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पिछले करीब पांच वर्षों से वह यह काम कर रहे हैं। मेरठ का ही उनका गिरोह है। वह अभी तक दो सौ से भी अधिक कारें चोरी की बेच चुके हैं। कागज बनने के बाद यह कारे जल्द पकड़ में नहीं आती हैं। आरोपियों ने बताया कि लॉकडाउन में वह चोरी के बाद तैयार की गई कारों को बेच नहीं सके थे। वह इन कारों के बेचने के लिए ही निकले थे कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस फरार सरगना की तलाश कर रही है। साथ ही इन आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही है।
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