माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। कवि नगर थाना पुलिस ने बापूधाम सदरपुर स्थित फार्म हाउस में नकली शराब और नकली गुटका बनाने की फैक्ट्री का खुलासा किया है। आरोपी ब्रांडेड गुटके की पैकिंग करते थे और 1 दिन में करीब 100 पेटी मिश्रित शराब तैयार करके आसपास के जिलों में बेचते थे। शनिवार रात को पुलिस ने की कार्रवाई में 85 पेटी मिश्रित शराब और लगभग एक हजार से अधिक का सामान बरामद किया है। वही गुटखा बनाने की मशीन एवं सामग्री बरामद की है । 5 आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
एसपी सिटी अभिषेक वर्मा ने बताया कि आरोपी फैक्ट्री में ही ढाई सौ एमएल की बोतल में शराब को पैक करते थे। उस बोतल को सील कर देते थे, जिससे किसी को असली और नकली के बारे में जानकारी न हो सके। इसके बाद शराब को नोएडा गाजियाबाद बुलंदशहर और मेरठ वे आसपास के अन्य जिलों में सरकारी ठेकों पर बेचते थे। फैक्ट्री में एक तरफ सीमेंट और सुपारी के साथ खतरनाक रसायन मिलाकर बड़े ब्रांड का गुटखा भी तैयार किया जाता था। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि एक आरोपी भागने में सफल हो गया। उन्होंने बताया कि आरोपी शराब और गुटखा बनाने की सामग्री दिल्ली और हरियाणा से खरीद कर लाते थे और यहां फैक्ट्री के अंदर इसे तैयार कर विभिन्न सरकारी ठेकों को उपलब्ध कराया जाता था। उन्होंने बताया कि इसमें ऐसा रसायन एवं केमिकल मिलाया जाता है, जिससे नशा तेजी से चढ़ता है और देर तक रहता है। इसलिए इस तरह की डिमांड भी ठेकों पर ज्यादा है। आरोपी मिलकर 100 पेटी से अधिक शराब तैयार करते हैं। जिससे इस शराब की आसानी से मार्केटिंग भी हो जाती है।
- पांच आरोपी गिरफ्तार
एसपी सिटी ने बताया कि फैक्ट्री से पांच आरोपियों सौंदा निवाड़ी के रहने वाले फारुक, शाहरुख, वरीश और रहीश के अलावा मोदीनगर निवासी आजाद को गिरफ्तार किया गया है। जबकि फार्महाउस का संचालक और इनका सहयोगी जगबीर सिंह भागने में सफल हो गया।
- लॉकडाउन में शुरू किया उत्पादन
आरोपियों का कहना था कि पहले वह कच्ची शराब वितरित करते थे, लेकिन लॉकडाउन में उसकी बिक्री बंद हो गई थी। इस कारण उन्होंने 4 महीने पहले मिश्रित शराब बनाने शुरू की और उसको आसपास के जिलों में बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन की वजह से ही उन्होंने अपनी फैक्ट्री बना ली और ठेकों पर सेटिंग करके काम भी अच्छा चलने लगा। आरोपियों ने बताया कि पुराने नेटवर्क के माध्यम से वर्तमान में करीब 1 दिन में 300 पेटी की डिमांड आने लगी। उन्होंने बताया कि वह लोगों की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे थे।
- 15 गुना से ज्यादा होता था फायदा
पुलिस ने बताया कि 10 हजार के कच्चे माल से करीब डेढ़ लाख रुपए का माल तैयार हो जाता था। आरोपियों की काफी मोटी आमदनी इससे होती थी। लेबर के ऊपर भी काफी पैसा खर्च किया जाता था जिससे कोई इधर उधर बात लीक न कर दे।