अरुण का कहना है कि बेटे की हालत गंभीर होने की सूचना पर वह और परिजन अस्पताल पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्हें पायल, ज्योति और जॉनी (ज्योति का लिव इन पार्टनर) की बातों पर शक हुआ तो साहिबाबाद थाना पुलिस से शिकायत की।
उपचार के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई। पुलिस ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया। इसकी रिपोर्ट से पता चला कि आदि की मौत लिवर फटने से हुई है। उसे बाहर की तरफ से चोट लगी थी। शरीर पर एक ही जगह चोट का निशान था। इससे साफ था कि ज्योति उस पर गिरी नहीं है।
सख्ती से पूछताछ में कुबूल किया सच
पुलिस ने ज्योति को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो वह काफी देर तक झूठ बोलती रही कि जो कुछ हुआ, वह हादसा था। सख्ती से पूछताछ में उसने सच कुबूल किया। साहिबाबाद की एसीपी पूनम मिश्रा ने बताया कि ज्योति ने बच्चे को लात मारना कुबूल किया।
उसने बताया कि वह कैरम बोर्ड को उठाकर अलमारी के ऊपर रख रही थी। आदि वहीं पर खेल रहा था। उसने अचानक उसका पैर पकड़ लिया। इससे वह गिर पड़ी। उसके हाथ से छूट जाने से कैरम बोर्ड टूट गया।
उसके पैर में भी मोच आई। इससे उसे गुस्सा आ गया। उसने आदि के पेट में बहुत जोर से लात मारी। वह बेहोश हो गया। इस पर उसकी मां को बताया। इसके बाद आदि को अस्पताल ले गए। सब कुछ अचानक हुआ, उसका इरादा बच्चे की जान लेने का नहीं था।
अरुण ने तहरीर में आदि की मौत के लिए पत्नी पायल को भी जिम्मेदार ठहराया है। गैर इरादतन हत्या की एफआईआर में उसे भी नामजद किया गया है। पुलिस ने पायल से भी लंबी पूछताछ की।
उसने बताया कि वह घटना के वक्त ज्योति के घर पर मौजूद नहीं था। कोर्ट में तारीख से आने के बाद वह बीमार सहेली को देखने चली गई थी। वहीं पर ज्योति ने फोन से बताया कि आदि को चोट लगी है, तब आई।
बेटी की हो गई थी कैंसर से मौत
अरुण ने बताया कि उसकी शादी सीमापुरी निवासी पायल से 2010 में हुई था। उनकी नौ साल की बेटी रितु और चार का बेटा आदि था। दो साल पहले कैंसर से रितु की मौत हो चुकी है जबकि छह जनवरी 2020 से पायल उनको छोड़कर डीएलएफ में अलग रह रही हैं। उसका आरोप है कि पुलिस ने पायल की गलती होते हुए भी उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की।