एक चिंगारी छोड़कर गए हैं सफदर हाशमी : नसीरुद्दीन शाह
साहिबाबाद। फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि जो बदलाव सफदर चाहते थे, वह जीते जी न कर पाए लेकिन एक चिंगारी छोड़कर गए हैं, जो हमेशा सुलगती रहेगी। रविवार को झंडापुर के आंबेडकर पार्क में कामरेड सफदर हाशमी और रामबहादुर की शहादत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में नसीरुद्दीन शाह और उनकी पत्नी रत्ना पाठक ने शिरकत की। उन्होंने लोगों के बीच में बैठ कर कालरात्रि नाटक का मंचन देखा, इसके बाद कार्यक्रम को संबोधित किया।
नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि मैं यह दावा नहीं कर सकता कि मैं सफदर हाशमी का दोस्त था, न मैं उनकी थियेटर कंपनी में शामिल था, न मैंने उनके साथ कभी काम किया और न उनसे कभी मुलाकात हो पाई लेकिन उनके बारे में मैं बहुत सुनता जरूर था। 1970 में मैंने एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) में दाखिला लिया था, उसी दौर में सुना करता था कि सफदर गांवों में मजदूरों और किसानों के बीच जाकर उनके मुद्दों और उनके हक को लेकर नाटक करते हैं। मुझे हैरत होती थी कि इतना पहुंचा हुआ कलाकार शहर में नाटक क्यों नहीं करता जिससे उन्हें पैसे मिले। सच ये है कि मेरी तलाश शोहरत थी और सफदर में बदलाव लाने का जूनून। उनके इंतकाल से काफी दुख है।
आर्ट का पुल कहानी सुनाई
नसीरुद्दीन शाह ने फहीम आजमी की कहानी आर्ट का पुल (कला का पुल) सुनाई। उन्होंने कहा कि इस कहानी को आप हिंदुस्तान-पकिस्तान के बंटवारे से जोड़ सकते हैं या हिंदुओं-मुसलमानों के बीच जो नफरत के बीज जो बोए जा रहे हैं, उससे जोड़ सकते हैं या और दूर जाएं तो पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी से जोड़ सकते हैं। इंसान और पर्यावरण के बीच जो दरारें पैदा हो रही हैं, उससे भी जोड़ सकते हैं। जो इस नफरत को भर सकती है वो इंसानी संपर्क और कला है।
नफरत की राजनीति हो रही है : एआर सिंधु
सीटू की राष्ट्रीय अध्यक्ष एआर सिंधु ने कहा कि नफरत की राजनीति हो रही है। लोगों की समस्याएं बढ़ी हैं और उनका कुछ समाधान नहीं हुआ है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, श्रमिकों को बुनियादी सुविधा नहीं मिल पा रही है। दिल्ली से आए सीटू के नेता अनुराग सक्सेना ने बताया कि पांच अप्रैल को लाखों किसान और मजदूर जुटेंगे। इस मौके सीटू नेता जेपी शुक्ला, केएम तिवारी, ईश्वर त्यागी, बृजेश कुमार सिंह, जेएस तिवारी मौजूद रहेंगे।