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373 पहुंचा एक्यूआई, देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा गाजियाबाद

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373 पहुंचा एक्यूआई, देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा गाजियाबाद
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साहिबाबाद। दिवाली के तीन दिन बाद जब हवा की रफ्तार कम हुई तो शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 373 पहुंच गया। बृहस्पतिवार को जिला देश के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार रहा। लोनी स्टेशन पर एक्यूआई सेवियर जोन में 445 रिकॉर्ड हुआ जो साल में अभी तक का सबसे खराब स्तर रहा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की मानें तो हरियाणा और पंजाब में जल रही पराली के धुएं से शहर की हवा लगातार प्रदूषित हो रही है। जबकि, यहां पर ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के नियम सिर्फ कागजों में ही दिखाई दे रहे हैं।
पिछले तीन दिनों से हवा की गति 15 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल रही थी। जिस कारण दिवाली पर छोड़े गए पटाखों के धुएं का असर ज्यादा नहीं हुआ लेकिन हवा की रफ्तार तीन किमी प्रतिघंटा होते ही प्रदूषण के स्तर में बढ़ोत्तरी हो गई। हवा की गति रविवार तक इसी रफ्तार से चलने पर प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
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पीसीबी की मॉनिटरिंग साइट को देखें तो लोनी के बाद इंदिरापुरम का एक्यूआई दूसरे पायदान पर 370, वसुंधरा का तीसरे स्तर पर 368 और चौथे नंबर पर संजय नगर का एक्यूआई 309 है। यहां सभी स्टेशनों पर पीएम 10 और पीएम 2.5 मानकों से तीन से साढ़े तीन गुना ज्यादा बढ़े हैं।
ग्रैप : नियमों का पालन हवा हवाई
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिवाली से पहले ही ग्रैप के तीसरे चरण के नियमों को लागू कर दिया था जिससे सरकारी संस्थाएं प्रदूषण से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम कर लें लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। 22 विभागों की तरफ से पानी का छिड़काव करने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
जगह-जगह जल रहा कूड़ा
जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। बृहस्पतिवार को लोहामंडी में सड़क किनारे पड़े कूड़े के ढेर में किसी ने आग लगा दी। पूरे दिन धुआं निकलता रहा। वहीं लोनी के लालबाग कालोनी में भी कूड़े से उठता धुआं पूरे दिन लोगों की परेशानी का सबब बना रहा। नगर निगम और नगर पालिका के अधिकारी कूड़ा उठने का दावा करते रहे लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही है।
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खुले में चल रहा निर्माण, टूटी सड़क से उड़ रही धूल
लोनी में हाईवे का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा टूटी सड़कों से लगातार उड़ रही धूल मिट्टी व औद्योगिक इकाइयों से निकलता काला धुआं हवा को और जहरीला बना रहा है। गाजियाबाद औद्योगिक क्षेत्र की टूटी सड़कों से उड़ने वाली धूल भी हवा के साथ ही लोगों की भी सेहत खराब कर रही है। यहां के उद्यमियों ने कई बार यूपीसीडा और निगम के अफसरों से सड़क बनाने की मांग कर चुके हैं। उद्यमी अनिल शर्मा का कहना है कि यहां पर पानी का छिड़काव भी नहीं हो रहा है। जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही वसुंधरा, विजय नगर, नंदग्राम समेत कई स्थानों पर खुले में निमार्ण कार्य भी हो रहा है।
301 से 400 एक्यूआई होने पर नियम
-रोजाना मशीनों से सड़कों की सफाई करानी होगी
-ज्यादा ट्रैफिक वाले क्षेत्रों में हर दूसरे दिन सड़कों पर पानी का छिड़काव
-तंदूर में भी कोयला और लकड़ी जलाने पर प्रतिबंध रहेगा
-अति आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी जगह डीजल जनरेटर के संचालन पर प्रतिबंध रहेगा
-सीएनजी और इलेक्ट्रिक बसों के फेरे बढ़ाए जाएंगे
एक्यूआई 400 से 450 होने पर
- मशीनों से सड़कों की सफाई और रोजाना पानी का छिड़काव
- लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना
- सभी निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा
- बिना पीएनजी के चल रहे उद्योगों को सीमित समय के लिए बंद किया जा सकता है
- ईंट भट्ठों, हॉट मिक्स प्लांट, स्टोन क्रशर को बंद कर दिया जाए
- राज्य सरकार चाहे तो पेट्रोल के बीएस थ्री व डीजल के बीएस-4 वाहनों पर लगा सकती है प्रतिबंध
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