सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय ठेकेदार और कर्मचारी की मौत
खोड़ा। नगर पालिका की न्यू जनता पार्क कॉलोनी में रविवार को सेप्टिक टैंक की सफाई करते समय निजी ठेकेदार और उसके एक कर्मचारी की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने मकान मालिक को हिरासत में ले लिया है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष है।
न्यू जनता पार्क कॉलोनी में राजबली पटेल के दो मकान हैं। वह नोएडा सेक्टर-6 की एक कंपनी में कर्मचारी है। एक मकान में वह खुद रहते हैं और दूसरा मकान उन्होंने किराये पर दे रखा है। रविवार को उन्होंने बुलंदशहर के जटोला गांव निवासी सुनील (40) और खुर्जा की भीमनगर कॉलोनी निवासी सुनील कुमार (26) को सफाई के लिए बुलाया। इन दोनों का परिवार खोड़ा में ही किराये के मकान में रहता है। ठेकेदार सुनील के चार बच्चे हैं और कर्मचारी सुनील कुमार के दो बच्चे हैं। दोनों सेप्टिक टैंक की सफाई करने का काम करते थे। मकान मालिक के बुलाने पर दोनों सफाई करने के लिए सुबह करीब सात बजे टैंकर लेकर पहुंचे और टैंकर का पाइप सेप्टिक टैंक में डालकर सफाई का काम शुरू कर दी। आधे घंटे में टैंकर टैंक के पानी से भर गया। इसके बाद वह उसे फेंककर दोबारा सफाई के लिए आए। बेहतर सफाई के लिए पहले कर्मचारी सुनील जीना लगाकर टैंक में उतरे लेकिन उनकी कोई आवाज न आने पर ठेकेदार सुनील ने कर्मचारी को आवाज लगाई लेकिन अंदर से आवाज न आने पर उन्हें शक हुआ और साथी को बचाने के लिए वह भी टैंक में उतर गए लेकिन वह भी बाहर नहीं आए। थाना प्रभारी अल्ताफ अंसारी का कहना है कि अभी तक इस मामले में तहरीर नहीं मिली है, शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जाएगी।
टैंक में अंदर न उतरते तो बच जाती जान
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि मकान मालिक और ठेकेदार की सेप्टिक टैंक की अच्छे से सफाई करने को लेकर बात हुई। इसके बाद कर्मचारी सुनील कुमार अपने कपड़े उतारकर टैंक में उतर गए। जब काफी देर तक सुनील बाहर नहीं आए तो ठेकेदार ने सुनील को आवाज लगाई लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई। इसके बाद ठेकेदार भी अपने साथी को बचाने के लिए टैंक में उतरे। वह भी बेहोश होकर टैंक में ही गिर गए। मकान मालिक ने उन्हें बचाने के लिए पड़ोसियों से मदद मांगी, लेकिन काफी कोशिश करने के बाद भी दोनों को नहीं निकाला जा सका। इसके बाद नगर पालिका और पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।
एक घंटे बाद पहुंची नगर निगम की टीम
पड़ोसियों का कहना है कि सूचना देने के एक घंटे बाद पालिका के कर्मचारी जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे और टैंक को तोड़कर दोनों को बाहर निकाला। इसके बाद दोनों को लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद दोनों के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दो लोगों ने की जान बचाने की कोशिश
दोनों को बचाने के लिए पवन शर्मा और हरेंद्र ने कोशिश की। पवन शर्मा ने हरेंद्र को रस्सी की मदद से सेप्टिक टैंक में उतारा लेकिन टैंक के अंदर गैस इतनी जहरीली थी कि डेढ़ से दो मिनट ही हरेंद्र उसमें रह पाए। इसके बाद उन्हें रस्सी की मदद से बाहर खींच लिया गया। वहीं पवन शर्मा ने भी उन्हें बचाने की कोशिश में बेहोश हो गए। आसपास के लोगों ने हरेंद्र और पवन शर्मा पर पानी डाला। इसके बाद दोनों को होश आया।
12 फीट गहरा टैंक, 10 फीट की सीढ़ी
पवन शर्मा ने बताया कि सेप्टिक टैंक का पानी तो निकल गया था, लेकिन वह आधा गंदगी से भरा हुआ था। यह टैंक करीब 12 फीट गहरा था, जिसमें उतरने के लिए 10 फीट की सीढ़ी लगाई गई थी, लेकिन गैस इतनी जहरीली थी कि दोनों में से कोई भी वापस नहीं आ सका। वह दो घंटे तक टैंक के अंदर तड़पते रहें। नगर पालिका के कर्मचारी टैंक तोड़कर नीचे उतरे और रस्सी बांधकर दोनों को बाहर खींचा। जब उन्हें बाहर निकाला गया तो उनकी सांसे थम चुकी थी। सेप्टिक टैंक से जहरीली गैस निकल रही थी। डर की वजह से नगर निगम के कर्मचारी टैंक में उतरने से कतरा रहे थे।
नगर पालिका ने नहीं बिछाई सीवर लाइन
लोगों ने इस घटना पर रोष जताया है, उनका कहना है कि पालिका की ओर से अभी तक सीवर लाइन भी नहीं बिछाई गई है। इसकी वजह से लोगों को सेप्टिक टैंक की सफाई निजी लोगों से करानी पड़ती है।