जगह का संकट...मंच पर नहीं दिखेगी राम की लीला
इंदिरापुरम। जगह नहीं मिलने से टीएचए में 15 वर्षों से हो रहे रामलीला के मंचन पर इस वर्ष विराम लग गया। श्री रामलीला समिति ट्रांस हिंडन के तत्वावधान में होने वाली यह रामलीला कविनगर के बाद शहर की दूसरी सबसे बड़ी रामलीला मानी जाती रही है। यही नहीं टीएचए में मेले की परंपरा भी धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जल्द ही जीडीए या आवास विकास परिषद जमीन की व्यवस्था नहीं करता है मेले सिर्फ किस्से और कहानियों में ही सिमट कर रह जाएंगे।
रामलीला का मंचन काफी सालों से इंदिरापुरम में एक निजी अस्पताल की जमीन पर आयोजित की जाती रही है। अब अस्पताल प्रबंधन ने अपनी भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि अब लीला का मंचन करने के लिए टीएचए में इतनी बड़ी कोई जगह नहीं और न ही कोई सरकारी मैदान है। समिति के मीडिया प्रभारी सोनू मल्होत्रा का कहना है कि समिति की ओर से लीला के साथ ही लोगों के लिए मेला भी लगाया जाता था। आवास विकास एवं जीडीए की ओर से अब तक टीएचए में कोई भी बड़ा मैदान विकसित नहीं किया गया रामलीला किया जा सके।
कोरोना काल में किया था सुंदरकांड का पाठ
रामलीला समिति ने कोरोना काल में केवल सुंदरकांड का पाठ किया था। समिति के पदाधिकारी राहुल शर्मा ने बताया कि कोविड प्रोटोकॉल के तहत दो वर्ष से रामलीला नहीं हुई। इस बार मेला लगाने का प्रयास किया गया लेकिन जगह न मिलने की वजह से आयोजन पर विराम लगा दिया गया। भविष्य में लीला के लिए पर्याप्त मैदान उपलब्ध होगा तो आयोजन पर फिर से विचार किया जाएगा।
मैदान न होने से महाकौथिग मेला नोएडा में लगा
वर्ष 2021 में मैदान के अभाव में ही उत्तराखंड समाज की ओर से लगाया जाने वाला महाकौथिग मेला पर भी विराम लग गया। अब यह मेला नोएडा में लगाया जाने लगा है। मेला संयोजक राजेंद्र चौहान का कहना है कि हमने गत वर्ष भी मैदान का मुद्दा उठाया था लेकिन आवास विकास की ओर से अब तक मैदान विकसित नहीं किया गया जिसकी वजह से बड़े आयोजन नहीं हो पा रहे।