अस्पतालों ने लगाए नो बेड के बोर्ड, ऑक्सीजन की रही किल्लत
साहिबाबाद। टीएचए में 18 अस्पतालों में कोरोना का इलाज हो रहा है। इन सभी में बेड फुल है। कुछ अस्पतालों के बाहर नो बेड के बोर्ड लग गए हैं। वहीं, अस्पतालों को मांग के अनुरूप ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से भी कुछ अस्पतालों ने मरीजों को लेना बंद कर दिया है।
टीएचए में लगातार कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। प्रशासन की तरफ से इलाके के 17 निजी अस्पतालों को कोरोना इलाज की अनुमति दी गई है। जबकि प्रशासन की तरफ से राजेंद्र नगर के ईएसआई अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया गया है। इन 18 अस्पतालों में से नौ अस्पताल ऐसे हैं जिनकी क्षमता 40 बेड से भी कम की है। जबकि सौ बेड से अधिक के मात्र पांच ही अस्पताल हैं। इनमें सबसे ज्यादा बेड यशोदा अस्पताल में है। यहां पर 150 बेड कोरोना मरीजों के लिए हैं। जो फुल चल रहे हैं। कोरोना के मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। 150 बेड की क्षमता वाले वसुंधरा का ले क्रेस्ट अस्पताल भी फुल है। अस्पताल प्रबंधन ने तो मेन गेट पर नो बेड का बोर्ड लगा दिया है। वसुंधरा का एटलांटा अस्पताल, वैशाली का चंद्रलक्ष्मी हॉस्पिटल और मोहननगर का नरेंद्र मोहन अस्पताल में 100-100 बेड हैं। यहां भी स्थिति खराब है। यहां भी अस्पताल में जगह नहीं है। यहां आने वाले मरीजों को वापस भेजा जा रहा है।
पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रही ऑक्सीजन
अस्पतालों में बेड नहीं मिलने की समस्या से पहले ही से मरीज जूझ रहे हैं। इसके साथ ही ऑक्सीजन की कमी ने अस्पताल प्रबंधनों की मुसीबत बढ़ा दी है। कई अस्पताल तो ऑक्सीजन की कमी के चलते गंभीर मरीजों को ले ही नहीं रहे हैं। बड़े अस्पताल किसी तरह ऑक्सीजन की व्यवस्था कर पा रहे हैं। जिससे एडमिट मरीजों को ऑक्सीजन दी जा सके, लेकिन जिस हिसाब से उन्हें ऑक्सीजन मिलनी चाहिए उतनी ऑक्सीजन उन्हें नहीं मिल रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत छोटे अस्पतालों को हो रही है। प्रबंधन के लोग ऑक्सीजन की व्यवस्था करने में लगे रहते है। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।