अब अमृत से इंदिरापुरम की प्यास
साहिबाबाद। इंदिरापुरम में पेयजल का बुरा हाल है। फिर भी पेयजल समस्या के निदान के लिए बनी डीपीआर को शासन तीन महीने से स्वीकृत नहीं कर रहा है जबकि जीडीए के पास फंड की भारी कमी है। ऐसे में अब जीडीए जल निगम से अमृत योजना के तहत डीपीआर को अमल में लाने का अनुरोध करेगा। इस हफ्ते जल निगम को यह प्रस्ताव सौंपा जाएगा।
जीडीए ने कंसल्टेंट से आगामी 30 वर्षों से आबादी का आकलन करते हुए पेयजल और सीवर पर डीपीआर बनवाई थी। फरवरी में ही कंसल्टेंट ने सर्वे का काम पूरा कर लिया था। पेयजल पर संशोधित डीपीआर भी बनवाई गई। अब डीपीआर को सौंपे करीब तीन महीने हो चुके हैं। जीडीए अधिकारियों का कहना है कि कंसल्टेंट ने 90 करोड़ से पेयजल की समस्या के निदान की डीपीआर अगस्त में जीडीए को सौंपी थी। इसके बाद यहां से स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया। शासन से स्वीकृत होने के बाद ही इस मद की राशि स्थापना निधि से मिल पाएगी। अधिकारियों के पास इसका जवाब नहीं है कि यह कब स्वीकृत होगा। उनका कहना है कि जीडीए के पास फंड की भारी कमी है। जीडीए चाहता है कि इंदिरापुरम में पेयजल और सीवर की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए डीपीआर पर जल्द काम शुरू हो। ऐसे में जीडीए अब जल निगम से अमृत योजना के तहत इस डीपीआर पर काम शुरू करने का अनुरोध करेगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
कई सोसायटियों में पानी का प्रेशर जीरो
1990 में एकल यूनिट के अनुसार पानी सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए पाइप लाइनें बिछाईं गईं थीं। बहुमंजिली इमारतों के बनते ही आबादी तेजी से बढ़ी। ऐसे में अब लाइनें लोड नहीं ले पाती हैं। बहुमंजिली इमारतों में पानी चढ़ता ही नहीं। डीपीआर में बताया इमारतों के बीच 45 जगह प्रेशर
मापी गई, जिनमें से 27 जगह प्रेशर मानक से कहीं कम पाया। मानक के अनुसार पानी का प्रेशर 2.5 किलोग्राम प्रति सेंटीमीटर होना चाहिए जो कि जीरो पाया गया। 1222 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इंदिरापुरम में 110 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछी हुई है। इनमें इतने लीकेज हैं कि 80 फीसद पाइप लाइन को बदलने की जरूरत बताई है। वहीं इंदिरापुरम को मात्र 14 क्वीसेक पानी गंगाजल प्लांट से मिलता है जबकि इतनी ही मात्रा में स्वीकृत पानी को स्टोर करने के लिए जीडीए ने कोई उपाय नहीं किया है। इसके चलते डीपीआर में भूमिगत जलाशय (यूजीआर) बनाने का सुझाव दिया है।
इंदिरापुरम में पेयजल के लिए बनाई गई डीपीआर पर काम शुरू होने में विलंब हो रहा है। ऐसे में जीडीए पेयजल समस्या के निदान के लिए अमृत योजना के तहत प्रस्ताव बनाकर जल निगम को सौंपेगा। इस बाबत इस हफ्ते जल निगम के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। - एके चौधरी, अधिशासी अभियंता, जीडीए