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Ghaziabad: नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप तलवार, 1947 में बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आये थे भारत

Fri, 06 Dec 2024 06:18 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार कुलदीप तलवार ने 90 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। शाम को हिंडन श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके बेटे रजत तलवार ने दी। इस मौके पर कुलदीप तलवार के छोटे भाई गदर फिल्म के लेखक शक्तिमान तलवार और परिवार के अन्य लोग, शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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नहीं रहे वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप तलवार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार कुलदीप तलवार का 90 साल की उम्र में शुक्रवार सुबह 10:30 बजे निधन हो गया। उन्होंने नेहरू नगर स्थित यशोदा हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली। पैर की हड्डी टूटने से 26 नवम्बर को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 

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हिंदी, उर्दू भाषा के कई अखबारों में उन्होंने लंबे समय तक लेखन कार्य किया। अमर उजाला में संपादकीय पेज पर नियमित लेखन करते रहे। पाकिस्तान, अफगानिस्तान व पड़ोसी देशों की  राजनीतिक गतिविधियों पर उनकी पैनी नजर रहती थी। अपने लेखों से वह पाठकों तक पड़ोसी देशों की राजनीतिक हलचल को पहुंचाते रहते थे। उनके निधन से पत्रकारीय और साहित्यिक जगत में शोक की लहर है। निधन की सूचना पर शोक संतृप्त परिवार को सांत्वना देने काफी संख्या में लोग अशोक नगर  स्थित उनके आवास पहुंचे। शाम को हिंडन श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके बेटे रजत तलवार ने दी। इस मौके पर कुलदीप तलवार के छोटे भाई गदर फिल्म के लेखक शक्तिमान तलवार और परिवार के अन्य लोग, शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे। 

12 साल की उम्र में ग़ाज़ियाबाद आ गए थे गाजियाबाद
16 नवम्बर 1934 को पाकिस्तान के खुशाब सरगोधा में जन्मे कुलदीप तलवार  1947 में बंटवारे के बाद परिवार के साथ गाजियाबाद आ गए थे। 78 वर्षीय सरदार गुरदीप आपको सिंह बताते हैं कि सबसे पहले वह बजरिया में कीर्तन वाली गली में रिफ्यूजी क्वार्टर में रहे। 6 भाई बहनों में वह दूसरे नंबर पर थे।
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 उन्होंने जीवन में अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का निर्वहन एक सच्चे कर्मयोगी की तरह किया। उनकी हिंदी और उर्दू भाषा मजबूत पकड़ थी।  शुरुआती दौर में  लतीफे लिखते थे। उर्दू का हिंदी में अनुवाद करते थे। 1965 में उन्होंने लतीफे लिखे।

पत्रकारिता में कदम रखने से पहले भारतीय खाद्य निगम( एफसीआई) में महाप्रबंधक के रूप में अपनी सेवाएं दीं। उनके नेतृत्व और प्रशासनिक कौशल ने संस्थान को एक नई दिशा दी। नौकरी करते हुए उन्होंने लेखन कार्य भी जारी रखा। मुम्बई से प्रकाशित होने वाले ब्लिट्ज और हिंदुस्तान टाइम्स जैसे कई अखबारों में समसामयिक विषयों पर लेखन कर समाज में अलख जगाते रहे।

वह अपने पीछे एक बेटा, रजत, और एक बेटी, एकता, छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी दिल्ली के राजकीय कालेज में संस्कृत की शिक्षक थीं। दो साल पहले उनका निधन हो गया। पिछले कुछ दिनों से वह बीमार थे। वरिष्ठ साहित्यकार आलोक यात्री कहते हैं कि पत्रकारीय जगत की अपूर्णीय क्षति हुई है।

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