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मूवी से भी एडवांस है चोरी का ढंग: चोरों ने 3.5 लाख में खरीदा सॉफ्टवेयर, मारुति की गाड़ी ढाई मिनट में करते पार

Mon, 10 Apr 2023 10:56 PM IST
आकाश दुबे माई सिटी रिपोर्टर, गाजियाबाद

सार

एप उन्हें नोएडा के एक व्यक्ति ने मुहैया कराया था। उन्होंने बताया कि ऐसे एप और टूल कार कंपनियों और एजेंसियों के पास रहते हैं। उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह 2019 से वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गाजियाबाद की विजयनगर थाना पुलिस ने ऐसे अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया है जो चाइनीज सॉफ्टवेयर के जरिए महज ढाई मिनट में मारुति की कोई भी कार चोरी कर लेते थे। यह गिरोह अब तक 200 से ज्यादा कारों को चोरी कर नेपाल, बिहार और पंजाब में बेच चुका है। पुलिस ने इनके पास से प्रताप विहार से चोरी हुई बलेनो और बुलंदशहर से चोरी की गई वैगनआर कार बरामद की हैं। इनके पास से ईसीएम (इंजन कंट्रोल यूनिट) प्लेट को हैक करने में काम आने वाला इंटरनेट कनेक्टेड सिस्टम, मोबाइल, कार की चिप वाली चाबियां और अन्य सामान बरामद किया है।

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एसीपी कोतवाली सुजीत राय ने बताया कि पकड़े गए वाहन चोर पंचशील कॉलोनी में रहने वाले गौरव भाटी उर्फ अमन और शाहपुर बम्हेटा में रहने वाले उमेश है। हापुड़ के बाबूगढ़ का रहने वाला इनका एक साथी दीपांशु चौहान फरार हो गया। उन्होंने बताया कि एसएचओ विजयनगर अनीता चौहान ने सोमवार सुबह डीपीएस चौराहा के पास से इन्हें गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि वाहन चोर गिरोह के इन बदमाशों ने साढ़े तीन लाख रुपये में एक ऐसा चाइनीज एप खरीदा था, जिससे यह मारुति की किसी भी कार को दो से ढाई मिनट में चुरा लेते थे।

यह एप उन्हें नोएडा के एक व्यक्ति ने मुहैया कराया था। उन्होंने बताया कि ऐसे एप और टूल कार कंपनियों और एजेंसियों के पास रहते हैं। उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि वह 2019 से वाहन चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और करीब 200 से ज्यादा गाड़ियां चुराकर बेच चुके हैं। उनका निशाना गाजियाबाद, दिल्ली और एनसीआर के शहरों में ऐसी गाड़ियां होती थीं, जो कई-कई दिनों से गलियों में खड़ी रहती थीं। इनके निशाने पर सिर्फ मारुति कंपनी की कार होती थीं।

ऐसे चुराते थे वाहन
एसीपी सुजीत कुमार राय ने बताया कि पकड़े गए वाहन चोर एक टैबलेट रखते थे, जिसमें वह चाइनीज एप मौजूद था, जिसमें कार के इलेक्ट्रॉनिक कोड को डिकोड किया जाता था। वह कार का दरवाजा मास्टर चाभी से खोल लेते थे। इसके बाद टैबलेट को एक केबल के जरिए स्टेयरिंग के पास कार की ईसीएम से जोड़ लेते थे। वह एप के जरिए कार के स्टेयरिंग लॉक को अनलॉक कर लेते थे। इस सिस्टम के जरिए एक ओटीपी उनके टैबलेट पर आता था, जिसके जरिए उन्हें किसी भी कार को अनलॉक करने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। स्टेयरिंग लॉक को अनलॉक करते ही कोई भी अन्य चाभी से कार स्टार्ट हो जाती थी और वह कार को लेकर फरार हो जाते थे। उन्होंने बताया कि दो सप्ताह पहले लुधियाना पुलिस ने इस गिरोह के चार-पांच लोगों को गिरफ्तार कर चोरी की 12 कार बरामद की थीं। इस गिरोह में करीब 20 से 25 लोग हैं। लुधियाना पुलिस ने इनके पास से फर्जी दस्तावेज बनाने के प्रिंटर व अन्य उपकरण भी बरामद किए थे।

कपड़ों की फेरी लगाकर चोरी के लिए तलाशते थे कार
एसीपी का कहना है कि पुलिस पूछताछ में वाहन चोर गौरव ने बताया कि वह बाइक पर कपड़ों की फेरी लगाता था। इसी बहाने कालोनियों में घरों के बाहर खड़े वाहनों की रेकी करता है। वह ऐसे वाहनों को चिह्नित करता था, जो कई दिन तक एक ही जगह पर खड़े रहते थे। यह गिरोह नई कारों को चुराता था, ताकि बाजार में अच्छे दाम मिल सके।
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यूज्ड कार बेचने वाले एप से नंबर पता कर बना लेते थे फर्जी आरसी
एसीपी सुजीत राय ने बताया कि चोरी की कारों को बिहार, नेपाल और पंजाब में बेचा जाता था। यह गिरोह पुरानी कार बेचने वाले एप से किसी भी ऐसी कार का नंबर पता कर लेते थे जो नई हो। इसके बाद फिर उसी कार के नंबर से खुद फर्जी आरसी तैयार कर लेते थे। इसके आधार पर ही कार के चेसिस और इंजन नंबर भी बदल लिए जाते थे। इसके बाद कार को असल मालिक बताकर महंगे दामों पर बेच दिया जाता था। जब भी कार खरीदने वाला कोई व्यक्ति वाहन एप के जरिए कार की जानकारी जुटाता था तो वह आरसी से मैच कर जाती थी। उन्होंने बताया कि प्रताप विहार से चोरी की गई बलेनो कार का सौदा उन्होंने छह लाख रुपये में कर दिया था। यह कार महज दो हजार किलोमीटर चली हुई थी। इनके पास से इस कार को बरामद कर लिया गया है।
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