- मामला गाजियाबाद में दर्ज हुआ है। न्यायिक परिक्षेत्र गाजियाबाद जिला न्यायालय या प्रयागराज हाईकोर्ट के क्षेत्र में आता है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर ट्विटर इंडिया के एमडी को राहत दी है।
- एमडी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में गलत तथ्य दिया है कि यूपी में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है।
- एमडी ने गलत तर्क दिया कि गाजियाबाद पुलिस नोटिस के जरिये बुलाकर उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। जबकि 41ए का नोटिस उन्हीं को भेजा जाता है, जिनकी गिरफ्तारी नहीं करनी होती।
- एमडी ने गाजियाबाद पुलिस से वर्चुअली प्रक्रिया शुरू करने की मांग रखी। जबकि दस्तावेजों से संबंधित विवेचना वर्चुअली नहीं हो सकती।
कर्नाटक हाईकोर्ट में दूसरी सुनवाई का भी इंतजार
कर्नाटक हाईकोर्ट ने ट्विटर एमडी की अर्जी पर 29 जून को सुनवाई की तारीख निर्धारित की थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट अपनी दूसरी सुनवाई में क्या आदेश देती है, इसका भी इंतजार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने जा रही विशेष अनुमति याचिका को इसी आदेश के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में डायरी नंबर जनरेट हुआ : एसएसपी
एसएसपी अमित पाठक का कहना है कि पुलिस के पास ट्विटर इंडिया के एमडी मनीष माहेश्वरी को मिली राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है। सोमवार को एसएलपी दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभी सिर्फ डायरी नंबर जनरेट हुआ है। सुनवाई के लिए केस लिस्टेड होने का इंतजार किया जा रहा है।