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जेल में बंद 84 किसानों को रिहा कर सरकार वार्ता का बनाए माहौल : टिकैत

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यूपी गेट पर किसान आन्दोलन मे मंच से बोलते राकेश टिकैत। - फोटो : SHAHIBABAD
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जेल में बंद 84 किसानों को रिहा कर सरकार वार्ता का बनाए माहौल : टिकैत
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साहिबाबाद। कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने के मुद्दे पर सरकार से वार्ता का दौर पिछले दस दिनों से बंद है। प्रधानमंत्री की तरफ से बातचीत के संकेत मिलने पर राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री का स्वागत है। किसानों की कमेटी बात करेगी, सरकार समय दे जिसमें बातचीत से ही हल निकलेगा। इस बीच उन्होंने कहा कि सरकार पहले जेल में बंद 84 किसानों को रिहा करे फिर बातचीत का माहौल बनाए। प्रधानमंत्री भी जय जवान जय किसान के नारा बोलें। राकेश टिकैत ने ‘मन की बात’ पर कहा कि लोग जैसे साफ कपड़े पहनते हैं, अगर उसी तरह साफ मन से सरकार बात करेगी तो समाधान निकलेगा। उधर, किसान आंदोलन के 68वें दिन मंच पर 11 किसानों की सुबह आठ बजे से भूख हड़ताल शुरू हुई। यह 24 घंटे चलेगी।
यूपी गेट पर सुबह करीब दस बजे किसानों के बीच पहुंचकर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सबसे पहले पदाधिकारियों के साथ बैठक की। आंदोलन स्थल पर मंच से उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की तरफ से मेसेज आया है कि वह बातचीत को तैयार हैं। हम भी प्रधानमंत्री का स्वागत करते हैं और इस पर किसानों की जो कमेटी है, वो आगे बातचीत करेगी। बैठक का समय मिलने पर बातचीत से ही समाधान निकलेगा। वह चाहते हैं कि प्रधानमंत्री का सम्मान व देश की कमेटी का भी सम्मान बना रहे। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 300 किमी के एरिया में हरियाणा और पंजाब का गठबंधन आंदोलन में मजबूत चाहिए। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले दस दिनों से सरकार और किसानों के बीच कृषि कानूनों को वापस लेने व एमएसपी पर गारंटी देने के मुद्दे, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने व गन्ने का बकाया भुगतान समेत अन्य मांगों पर वार्ता बंद है। मगर किसान अभी भी बात को तैयार है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस पर हुई घटना में करीब 84 लोगों को जेल में बंद किया गया है। सरकार पहले उन्हें रिहा करे और फिर बातचीत का माहौल बनाए। देशभर में जो गोदाम बन रहे हैं, उसमें गरीब की रोटी और किसानों का अनाज कैसे बंद हो जाएगा। यह आंदोलन भी उन्हीं गोदामों के खिलाफ चल रहा है। इसके बाद उन्होंने कहा कि गरीब की रोटी व किसान की पगड़ी तिजोरी में बंद नहीं होगी। रोटी किसी बाजार की वस्तु नहीं बनेगी, बल्कि रोटी तो प्रसाद होती है वह लंगर में भूखों की भूख मिटाने के लिए होती है। किसान और गरीब की रोटी व्यापार का हिस्सा नहीं हो सकती। राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि इस कानून से जब अनाज तिजोरी में बंद हो जाएगा तो आम जनता पर काफी बोझ पड़ेगा।
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मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा : राकेश टिकैत
भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि मैं चुनाव नहीं लड़ूंगा। यहां आए किसान अलग-अलग दलों से ताल्लुक रखते हैं और वह कहीं भी वोट डालने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उनकी मांगें मान लें, वह धरना खत्म करने में देर नहीं करेंगे, अन्यथा साल दो साल आंदोलन चलता रहेगा।
किसानों को दिल्ली नहीं जाना
दिल्ली बॉर्डर सील होने पर राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को दिल्ली नहीं जाना। बॉर्डर पर पुलिस ने क्या व्यवस्था की है। इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अभी साफ मन से बात नहीं कर रही है। अगर बैठक में साफ मन से बात होगी तो फिर समाधान जरूर निकलेगा। उन्होंने कहा कि जब कलम और कैमरे पर बंदूक का पहरा होगा तो फिर किसान आंदोलन से आम जनता कैसे जुड़ेगी। प्रेस की आजादी की लड़ाई भी जल्द लड़ी जाएगी।
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मुफ्त में लड़ेंगे किसानों का मुकदमा
हरियाणा के बार एसोसिएशन फतेहाबाद के कई वकील रविवार को आंदोलन स्थल पर पहुंचे। इन वकीलों का कहना था कि वह मुफ्त में किसानों का मुकदमा लड़ेंगे। यही बात चरखी दादरी से पहुंचे वकीलों का भी कहना था। इस बीच देर शाम बागपत, मुजफ्फरनगर की ओर से किसानों के यहां पहुंचने का सिलसिला जारी था।
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