किसान अब एक्सप्रेसवे पर चलाएंगे स्कूल
साहिबाबाद। किसानों ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहले तो गांव बसाया। अब आंदोलन के लंबे चलने के आसार को देखते हुए अगले दो-तीन दिनों में स्कूल खोलेंगे। इस स्कूल के विद्यार्थी पांच साल के बच्चे से लेकर 100 साल तक के बुजुर्ग भी होंगे। इन्हें मुख्य रूप से शिक्षा और उनके अधिकार के पाठ पढ़ाए जाएंगे। बकायदा पाठ्यक्रम भी बनाए गए हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रोजेक्टर लगाया जा रहा है, वहीं बुजुर्गों को देशभक्तों की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। सभी में संविधान की समझ विकसित की जाएगी ताकि वह नागरिक अधिकारों को लेकर शिक्षित हो सकें।
महिला वालंटियर हेड रवनीत कौर ने बताया कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर 100 लोगों के बैठने के लिए एक मिनी स्कूल (पंडाल) बनाया है। बारिश के मौसम को देखते हुए इस पंडाल को वाटरप्रूफ बनाया है। सबसे महत्वपूर्ण है कि मिनी स्कूल में बुजुर्ग जहां होर्टिकल्चर और एग्रीकल्चर के अलावा संविधान में अपने अधिकारों के बारे में जानेंगे। वहीं, बच्चों को कलर बुक के साथ इतिहास की किताबें पढ़ाई जाएंगी। रवनीत ने बताया कि बड़ों-बुजुर्गों को शाम छह बजे के बाद प्रोजेक्टर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर, सुभाष चंद्र बोस व शहीद भगत सिंह की तमाम क्रांतिकारी व योद्धाओं की डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। रोजाना इस मिनी स्कूल में बच्चों को सुबह से दोपहर तक और बुजुर्गों व महिलाओं को शाम सात से रात नौ बजे तक डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाएगी। युवा टीम के मनजोत सिंह का कहना है कि बच्चों की मिनी लाइब्रेरी को सांझी सत यानी बच्चों की अपनी चौपाल नाम दिया गया है।
प्रोग्राम को ‘एक दिन-एक प्रदेश’ का दिया नाम
मिनी स्कूल में सभी केरल, आंध्रप्रदेश, ओडीसा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब समेत तमाम राज्यों की संस्कृति को बताया जाएगा। इसके लिए प्रोग्राम को ‘एक दिन-एक प्रदेश’ नाम दिया गया है। टीम ने बताया कि किसी भी राज्य की संस्कृति को बताने में कोई परेशानी न हो। इसके लिए संबंधित राज्यों के विशेषज्ञों से संपर्क किया जा रहा है। जल्द ही इस कार्यक्रम को शुरू किया जाएगा। जबकि लोगों के पढ़ने के लिए पंजाबी, हिंदी, अंग्रेजी और अन्य भाषाओं की किताबें मंगाई जा रही हैं।
विभिन्न मुद्दों पर होंगे संवाद
रवनीत के मुताबिक, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर इस सांझी सत में युवाओं के बीच विचार-विमर्श होगा। जिसमें होर्टिकल्चर, एग्रीकल्चर, किसान आंदोलन, जमीन अधिग्रहण, बिजली बिल और किसानों की समस्याएं आदि मुद्दे होंगे। युवाओं को अपना भविष्य बनाने में किन-किन योजनाओं की जरूरत होगी या उन्हें खेती में किन सरकारी स्कीम से राहत मिलेगी इसके बारे में बताया जाएगा। युवा टीम ने मिनी स्कूल को अगले दो दिनों में शुरू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।