अब तीनों कानून वापस की है उम्मीद : राकेश टिकैत
साहिबाबाद। किसान आंदोलन के 37वें दिन शुक्रवार को किसानों ने यूपी गेट-गाजीपुर बॉर्डर से खोड़ा कट तक सफाई अभियान चलाकर सरकार को शुद्धि-बुद्धि का संदेश दिया। इस दौरान भाकियू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि उन्हें 4 जनवरी की वार्ता में सरकार द्वारा तीनों कानून वापस लेने और एमएसपी पर गारंटी मिलने की उम्मीद है। साथ ही कहा कि जब तक सरकार इन मांगों को नहीं मानेगी तब तक कोई भी किसान पीछे नहीं हटेगा। इस दौरान रालोद नेता जयंत चौधरी भी किसानों के बीच समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जनभावना के आगे सरकार की कोई मजबूरी नहीं होनी चाहिए। उधर, 11 नए किसानों ने शुक्रवार सुबह आठ बजे से भूख हड़ताल शुरू की।
आंदोलन स्थल से किसानों को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि कमेटी ने पहले तय किया था कि 30 दिसंबर की बैठक में सरकार जिन मुद्दों पर बात करना चाहती है उसे पूरा सुनेंगे और इसके साथ-साथ किसान अपने मुद्दों को रखेंगे। जिस पर सरकार ने तीन कानूनों को वापस लेने के बारे में कोई बात नहीं की। एमएसपी पर गारंटी को लेकर सरकार ने लंबी बात की लेकिन इस पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला। पराली वाले मुद्दे को सरकार ने मान लिया। बिजली अधिनियम पर सरकार पहले बिल लेकर फिर सब्सिडी खातों में देने की बात कह रही थी इसे किसानों ने मना कर दिया। जिसे सरकार ने काफी विचार-विमर्श के बाद मान लिया। उन्होंने कहा कि चार जनवरी की बैठक से मुख्य तौर पर तीनों कानूनों को वापस लेने और एमएसपी पर गारंटी की बात होगी। उधर, सुबह करीब नौ बजे से किसानों द्वारा चलाए गए सफाई अभियान में महिलाओं और बच्चों ने भी योगदान दिया। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी सुभाषिनी अली ने भी किसानों को संबोधित किया। तराई किसान संगठन के अध्यक्ष तजिंदर सिंह विर्क ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सरकार ने किसी भी किसान पर गलत तरीके से कार्रवाई करने का प्रयास किया तो फिर सभी किसान एकजुट होकर कड़ा विरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी एक गांव का किसान वापस घर जाता है तो फिर वह 15 किसानों को आंदोलन में भेजने की तैयार करें। इससे सभी का काम चलता रहेगा।
18 दिन बाद टूटा बुजुर्ग किसान का मौन व्रत
किसान आंदोलन में हाइवे पर बने मंच पर बैठे फिरोजाबाद के सिरसागंज निवासी 60 वर्षीय सुरेश चंद का युवा भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव टिकैत ने माला पहनाकर मौन व्रत तुड़वा दिया। गौरव टिकैत ने बताया कि बुजुर्ग किसान ने छह दिसंबर से सत्याग्रह शुरू किया था जबकि वह 14 दिसंबर से मौन व्रत पर थे। इस दौरान सुरेश चंद ने एक समय का खाना त्याग रखा था।
जनभावना के आगे सरकार की कोई मजबूरी नहीं होनी चाहिए : जयंत
रालोद नेता जयंत चौधरी ने कहा कि किसान आशावादी होता है। क्योंकि जब फसल बर्बाद हो जाती है तो किसान फिर से मेहनत में जुट जाता है। चार जनवरी को होने वाली वार्ता से उम्मीद है कि सरकार किसानों की मांगों को मान कर उन्हें राहत देगी। किसानों की वाजिब मांग हैं और यह आंदोलन बड़ा ही अनुशासित है। मुख्य धारा में जो लोग बैठे हैं तो उन्हें किसानों की परेशानी को समझना चाहिए। जयंत ने कहा कि जनभावना के आगे चुनी हुई सरकार की कोई मजबूरी नहीं होनी चाहिए। जनभावना किसानों के साथ है। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दे पर पार्टी चुनाव लड़ती है। क्योंकि हम लोग चाहते हैं कि देश का किसान मजबूत बने। यदि किसान आंदोलन में मुख्य मांगों को नहीं माना जाता है तो फिर पूरा विपक्ष एकजुट होकर मुद्दे उठाएगा। उन्होंने कहा कि किसान किसी के बरगलाने में नहीं आता, किसान सभी बातों को समझता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में जान गंवाने वालों किसानों को सरकार जो भी मदद दे सकती है वो जरूर मिलनी चाहिए। इसके बाद जयंत चौधरी ने राकेश टिकैत और सरदार वीएम सिंह से भी काफी देर तक बैठकर वार्ता की। जिसमें सभी पहलू और सरकार से वार्ता के बारे में बातचीत हुई।