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अलाव और हुक्के के सहारे कट रही किसानों की सर्द रात

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अलाव और हुक्के के सहारे कट रही किसानों की सर्द रात
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साहिबाबाद। पांच डिग्री तापमान में खुले आसमान से ओस की बूंदें धीरे-धीरे किसानों के सिर पर पड़ रही थी। किसान ट्रॉली के नीचे पतले से गद्दे पर रजाई ओढ़कर सर्दी से बच रहे थे तो 60 पार के कुछ किसान अलाव के पास बैठकर हुक्का गुड़गुड़ाकर आंदोलन पर चर्चा कर रहे थे। सड़क की दूसरी तरफ रागिनी के साथ मटके की धुन पर गायक को चारों ओर से घेरे हुए किसान मस्ती में झूमकर अपनी थकान मिटा रहे थे। बृहस्पतिवार देर रात यूपी गेट पर इस तरह का नजारा था। अमर उजाला लाइव में प्रस्तुत है किसान आंदोलन से जुड़ी तस्वीरों के साथ जानकारी :
रात-10:16 बजे : ट्रॉली के नीचे तो कुछ फुटपाथ पर सो रहे किसान
सर्दी बढ़ने के साथ कुछ किसान सड़क पर बनाई गई झोपड़ी में जाकर सो गए तो अधिकांश किसान अलाव के पास बैठकर आगे की रणनीति बनाने में जुटे थे। दूर-दराज से आए जिन किसानों को झोपड़ियों में जगह नहीं मिली थी, वो ट्रॉली के नीचे या सड़क किनारे फुटपाथ पर पल्ली डालकर गद्दे और रजाई ओढ़कर सो रहे थे। वहीं कुछ किसान दिल्ली की ओर बैरिकेडिंग के पास कुर्सी डालकर आगे के आंदोलन पर बात कर रहे थे।
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रात10:38 बजे -मटके की धुन पर थिरक रहे थे किसान
यूपी गेट पर रागिनी के साथ मटके की धुन ने किसानों के बीच समां बदला हुआ था। करीब 50-60 किसान तिरपाल पर बैठकर रागिनी गायक के साथ सुर में सुर मिला रहे थे तो कुछ आसपास खड़े होकर ठुमके लगा रहे थे। पौने घंटे से ज्यादा समय तक एक किसान ने रागिनी में सरकार पर तंज कसते हुए अन्य किसानों को आनंदित किया। वहीं इस पूरे दृश्य को कई किसान अपने मोबाइल में भी कैद कर रहे थे।
रात 11 : 00 बजे - हाइवे पर चल रहा था लंगर
दूर-दराज से आए किसानों को खाने-पीने की कोई कमी नहीं हो रही है। बृहस्पतिवार की रात करीब ग्यारह बजे भी हाइवे पर सिख किसान अन्य लोगों को लंगर में प्रसाद खिला रहे थे। तो दूसरी तरफ से अगले दिन के लिए सब्जियां कट रही थीं। जबकि तीन-चार किसान भट्टी पर खाने को गर्म करते हुए नजर आए। यहां एक किसान ने बताया कि लंगर में रोटी, सब्जी के अलावा पानी और अन्य प्रकार की व्यवस्था है। वह लोगों की सेवाभाव के लिए लंगर चलाए हुए हैं। इस लंगर से कुछ मीटर पहले अन्य किसान दूसरे लंगर को चालू करने के लिए टेंट लगाने में जुटे हुए थे।
परिचर्चा :
- हम लोग घर परिवार को छोड़कर यहां मौज मस्ती के लिए थोड़ी न आए हैं। किसान दो-तीन डिग्री में जब खेत में पानी देता है तो उसे क्या ठंड लगेगी। मेरे साथ चार-पांच दोस्त आए हैं, सभी गाड़ी में ही पिछले 20 दिनों से सो रहे हैं। घर से बाहर थोड़ी दिक्कत तो होती है। -शेर सिंह, पुरकाजी
- हम लोग अपने घरों से रजाई गद्दे लेकर आए हैं। दिनभर आंदोलन में शामिल रहने के अलावा रात में ट्रॉली में ही पराली पर सो जाते हैं। सरकार को भी सोचना चाहिए कि इतनी सर्दी में किसान दिल्ली के द्वार पर हैं। वह इसका फायदा ना उठाए। सरकार को हठधर्मिता छोड़नी चाहिए। -अशोक कुमार,बागपत
-किसान के लिए सर्दी-गर्मी क्या उसे तो पूरे साल खेत में ही रहना पड़ता है। प्रशासन की तरफ से अलाव की व्यवस्था है। मैं खुद रात में किसानों की सुरक्षा के लिए पहरा देता हूं। हमें सर्दी से दिक्कत नहीं सरकार से जवाब मिलने में हो रही देरी से परेशानी है। -सुखराज सिंह, हापुड़
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दिनभर आंदोलन को समर्थन देने के बाद मैं संदिग्धों पर नजर रखता हूं। यूपी गेट पर हमारी आधी सर्दी तो रागिनी और किसानों के साथ रणनीति बनाने में ही दूर जाती है। इसके बाद साथियों के साथ ट्रॉली में ही सो जाता हूं। गद्दे, रजाई, खेस लेकर आया हूं। -आंनद पंवार,बागपत
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