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स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की बात सही नहीं : राकेश टिकैत

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स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने की बात सही नहीं : राकेश टिकैत
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साहिबाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने पर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि प्रधानमंत्री की एडवाइजरी कमेटी के लोग गलत हैं। वह पीएम से झूठ बुलवाते हैं। वह देश के प्रधानमंत्री हैं उन्हें इस तरह के झूठे दस्तावेज नहीं देने चाहिए। स्वामीनाथन कमेटी के नाम पर गलत दस्तावेज उनकी कमेटी के लोग दे रहे हैं। तो इन लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने का दावा सरासर झूठ है।
राकेश टिकैत ने कहा कि पीएम ने किसानों को 1600 करोड़ की मदद करने की जो बात कही वह झूठ है। यह मदद नहीं, शुगर मिलों पर किसानों का बकाया है। उसका भुगतान शुगर मिल को करना था। अगर सरकार उसको दे रही है तो शुगर मिलों को मदद मिल रही है। सरकार अगर इसे इंसेंटिव के रूप में देती तो कोई लाभ होता है। उन्होंने कहा कि पीएम भंडारण के लिए ढांचे की बात कर रहे लेकिन वह अपील कॉर्पोरेट से कर रहे हैं। इससे साफ है कि सरकार अब खेती को नहीं एग्री बिजनेस को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने का दावा कर रही है। जबकि उस रिपोर्ट में सी2+ 50 प्रतिशत जोड़कर पैसे देने की बात है। मगर आयोग की रिपोर्ट के फार्म्युले को ही बदल दिया है। इससे तो किसानों का हक मारा जा रहा है।
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किसानों को नहीं चाहिए 500 रुपये प्रतिमाह : राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार किसानों को पांच सौ रुपये प्रतिमाह देने की बात कह रही है लेकिन हमें समर्थन मूल्य का हक चाहिए। यूरिया का पांच किलो वजन घटा दिया, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि सुधार से किसानों का क्या लाभ होगा, अभी तक यह नहीं बताया गया। दलहन की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर नहीं होती। बुंदेलखंड की मंडी इसका उदाहरण है। जबकि वहां का किसान आत्महत्या कर रहा है। इसके अलावा किसानों को मंडी से बाहर फसल की बिक्री करने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा, इसका भी कोई आश्वासन नहीं मिला है। उधर, देर शाम भाकियू के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक द्वारा एक चार्ट जारी किया गया। जिसमें कहा कि यूपीए के शासन काल में औसतन एमएसपी की बढ़ोतरी आठ से 12 प्रतिशत की थी। लेकिन पिछले कई वर्षों से महज एक से पांच प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई है। पिछले तीन वर्षों से एमएसपी पर फसलों की खरीद ही नहीं हुई है।
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