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राजनीति में आकर देशसेवा करना चाहती हैं केबीसी की विजेता छवि

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राजनीति में आकर देशसेवा करना चाहती हैं केबीसी की विजेता छवि
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साहिबाबाद। कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रुपये जीतने वाली 12वें सीजन की पहली विजेता गाजियाबाद निवासी छवि कुमार राजनीति में आकर देशसेवा करना चाहती हैं। वह मोहननगर की गुलमोहर ग्रीन सोसायटी में ससुर संतोष कुमार, सास हेमा, पति अशेष कुमार और बेटियां रागिनी व निमिषा के साथ रहती हैं। एक करोड़ रुपये के सवाल को क्विट कर इतनी बड़ी रकम जीतने के बाद छवि और उनके परिवार के सदस्य काफी खुश हैं। सभी ने घर पर केक काटकर खुशी मनाईं। सोसायटी से बधाइयां देने वाले लोगों का देर रात उनके घर पर तांता लगा रहा।
भारतीय वायुसेना में विंग कमांडर अशेष कुमार दो साल पहले ही मोहननगर की गुलमोहर ग्रीन सोसायटी में रहने आए हैं। इससे पहले उनकी पोस्टिंग गुजरात के जामनगर में थी। छवि ने 2019 नवंबर में राजनगर के द मॉडर्न स्कूल के जूनियर विंग को पढ़ाना शुरू किया था। वह अंग्रेजी की शिक्षिका हैं। अमर उजाला से बातचीत में छवि ने बताया कि 2000 में उन्होंने महानायक अमिताभ बच्चन को केबीसी में देखा था। उसी दौरान से वह उनसे मिलने के लिए जुट गईं। 2012 में छवि ने केबीसी में प्रयास किया लेकिन ऑडिशन लेवल से आगे बढ़ने में सफलता नहीं मिली। करीब आठ साल बाद 2020 में उन्हें 50 लाख रुपये जीतने में सफलता मिली।
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बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुरक्षित रखेंगी पैसे
छवि का कहना है कि केबीसी में जीती रकम को वह बेटियाें निमिषा और रागिनी के उज्ज्चल भविष्य के लिए सुरक्षित रखेंगी, जिससे कि उन्हें आगे पढ़ाई करने के लिए कहीं भी एडमिशन लेने में दिक्कत न आए। वह स्वयं भी पीएचडी कर अपनी शैक्षिक योग्यता को बढ़ाना चाहती हैं। छवि के मुताबिक पीएचडी के बाद देशसेवा करने के लिए राजनीति भी आएंगी। हालांकि इसके बारे में उन्होंने अभी ज्यादा कुछ सोचा नहीं है।
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आठ साल बाद केबीसी के सेट पर खाई मिठाई
छवि का कहना है कि 2012 से उन्होंने मिठाई खाना बंद कर दिया था। केबीसी के ऑडिशन राउंड से आगे न बढ़ने पर वह निराश नहीं हुईं, बल्कि उन्होंने इसे अपना जुनून बना लिया और दृढ़ संकल्प के बूते कोरोना काल में पढ़ाई कर यह केबीसी की हॉट सीट पर पहुंचकर सफलता हासिल की। उन्होंने बताया कि चैनल के आयोजकों ने विजेता होने के नाते मेरे लिए पूरी तैयारी की हुई थी। पति अशेष कुमार भी इस दौरान साथ थे तो सेट पर ही पति के हाथों से आठ साल बाद पहली बार मिठाई खाई। इसके बाद घर आकर सास, ससुर और बेटियों के साथ केक काटकर खुशी जाहिर की।
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