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बॉर्डर पर दुश्मनों से ली टक्कर, अब लोगों की जान बचा रहीं महिला जवान

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इंस्पेक्टर पूजा वर्मा
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बॉर्डर पर दुश्मनों से ली टक्कर, अब लोगों की जान बचा रहीं महिला जवान
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गाजियाबाद। बाढ़, सुनामी, आग लगने की घटना हो या फिर किसी इमारत का ढह जाना। आठवीं बटालियन एनडीआरएफ में 31 महिला जवान हर चुनौती का सामना कर लोगों की जान बचाने को हर वक्त मुस्तैद रहती हैं। आईटीबीपी की सभी जुझारू महिला जवान और अधिकारी बॉर्डर पर दुश्मनों को सबक सिखाने के बाद अब एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल) में लोगों की जान बचाने की नई जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। आईटीबीपी के बाद एनडीआरएफ में महिला टीम की कमान संभाल रहीं इंस्पेक्टर पूजा वर्मा, सब-इंस्पेक्टर शिवानी अग्रवाल और सब-इंस्पेक्टर दीपिका सिंह के साथ बाकी 28 महिला जवान विभिन्न आपदाओं में राहत बचाव अभियानों के साथ दिल्ली-एनसीआर में होने वाली विभिन्न मॉक ड्रिल, आपदा संबंधी कम्यूनिटी अवेयरनेस और स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम में प्रशिक्षण कर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं।
महिला एनडीआरएफ टीम के काम को खूब सराहा जा रहा है। आठवीं बटालियन के कमांडेंट पीके तिवारी ने बताया कि बीते साल देशभर में आईटीबीपी की विभिन्न बटालियन से 31 महिला जवान व अधिकारियों का पहला बैच एनडीआरएफ में शामिल हुआ। सभी महिला जवान मेडिकल फर्स्ट रेस्पोंडर, कॉलेस्प्स्ड स्ट्रक्चर सर्च एंड रेस्क्यू, बॉडी मैनेजमेंट, फायर फायटिंग, रोप रेस्क्यू कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं। वहीं, केमिकल बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) का प्रशिक्षण में भी सफलता पाई है। प्रशिक्षण का क्रम लगातार जारी है। पिछले दिनों गढ़मुक्तेश्वर में कार्तिक मेले में टीम ने बहुत अच्छा कार्य किया। वहीं, विभिन्न मॉक ड्रिल, कम्यूनिटी अवेयरनेस व स्कूल सेफ्टी कार्यक्रम में भी महिला टीम सराहनीय कार्य कर रही है।
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उत्तरकाशी में जाना आपदा में बचाव कार्य का महत्व : इंस्पेक्टर पूजा वर्मा
एनडीआरएफ आठवीं बटालियन की महिला टीम की कमान संभाल रहीं इंस्पेक्टर पूजा वर्मा एनडीआरएफ से पहले 12वीं बटालियन उत्तरकाशी में तैनात थीं। उत्तरकाशी में विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में बटालियन के पुरुष जवानों द्वारा लोगों की जान बचाने के बाद राहत-बचाव अभियान का महत्व जाना। हापुड़ के कोठी गेट निवासी पूजा वर्मा का बचपन से सेना में जाने का सपना 2011 में आईटीबीपी में उपनिरीक्षक पद पर भर्ती होकर पूरा हुआ। उनके पति मनीष वर्मा चार्टर्ड अकाउंटेंट व बेटा शौर्य पांचवीं क्लास का छात्र है। उन्होंने बताया कि पहले पहाड़ों के दुर्गम रास्तों पर 10 किलो की राइफल लेकर रोजाना कई किमी गश्त तक अपनी सीमा की सुरक्षा की। अब अपनी टीम के साथ विभिन्न आपदाओं में राहत-बचाव अभियानों में लोगों की जान बचाने के चुनौतीपूर्ण कार्य को बखूबी निभाऊंगी।
राहत-बचाव अभियानों की सीखी हर बारीकी : दीपिका सिंह
एनडीआरएफ आठवीं बटालियन की महिला टीम में सब-इंस्पेक्टर दीपिका सिंह एनडीआरएफ से पहले 25वीं बटालियन आईटीबीपी अरुणाचल प्रदेश में तैनात थीं। मूलरूप से जालौन की रहने वाली दीपिका 2016 में आईटीबीपी में भर्ती हुईं। अरुणाचल प्रदेश में तैनाती के दौरान एनडीआरएफ में महिला टीम बनाए जाने के दौरान मिले अवसर को तुरंत स्वीकार किया। बॉर्डर पर दुश्मनों से टक्कर लेने के साथ आपदाओं में लोगों की जान बचाने के चुनौतीपूर्ण कार्य को निभाने में जुटी हुई हैं। एनडीआरएफ में कठिन प्रशिक्षण में राहत-बचाव अभियानों की हर बारीकी को सीखने का मौका मिला। कठिन प्रशिक्षण का ही परिणाम है कि बाढ़, भूकंप, इमारत ढहने के साथ विभिन्न अभियानों में अपनी जिम्मेदारी को कुशलता से अंजाम देने का हुनर हासिल हुआ है।
प्रशिक्षण के बूते क्षमता में हुआ इजाफा : शिवानी अग्रवाल
एनडीआरएफ आठवीं बटालियन की महिला टीम में सब-इंस्पेक्टर शिवानी अग्रवाल एनडीआरएफ से पहले 16वीं बटालियन आईटीबीपी लेह, लद्दाख में तैनात रहीं। 2016 में आईटीबीपी में भर्ती हुई जालौन की ही रहने वालीं शिवानी का कहना है कि आपदाओं में लोगों की जान बचाने का कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में एनडीआरएफ में आने के बाद उन्हें बेहद कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा। बाढ़, सुनामी, भूकंप, इमारत ढहने के साथ केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोएक्टिव व न्यूक्लियर आपदा से निपटने का चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण मिला। इसके बूते उनकी क्षमता में बहुत इजाफा हुआ है। आपदाओं में लोगों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया गया है। ऐसे में एनडीआरएफ के संकल्प को ध्यान में रख अपने कार्यों को अंजाम देंगे।
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लोगों की जिंदगी बचाने की मिशन के लिए है तैयार : मीना जांगिड़
एनडीआरएफ आठवीं बटालियन महिला टीम में शामिल कांस्टेबल मीना जांगिंड़ एनडीआरएफ से पहले नौवीं बटालियन आईटीबीपी अरुणाचल प्रदेश लोहितपुर में तैनात थीं। एनडीआरएफ की महिला टीम में शामिल होने के मिले अवसर को उन्होंने फौरन स्वीकार कर लिया। अरुणाचल प्रदेश में काम के दौरान उन्हें पहले से ही आपदाओं में राहत-बचाव अभियान की चुनौतियों का अंदाजा था। ऐसे में अब एनडीआरएफ में रोजाना कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम में नित नया सीखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण की मदद से विभिन्न अभियानों के स्वरूप और लिए जाने वाले एक्शन की पूरी जानकारी मिली है। लोगों की जिंदगी को बचाने के मिशन के लिए हम पूरी तरह से तैयार हैं।
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