25 मार्च से 31 मई तक लगे लॉकडाउन में साइबर ठगों ने 310 लोगों को अपना शिकार बनाते हुए उन्हें डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई। लोग शिकायत करने पुलिस के पास भी नहीं जा सके। अधिकांश मामलों में अनलॉक-वन होने पर ही शिकायत दर्ज हुई। लॉकडाउन के बाद भी साइबर ठगी का ग्राफ बढ़ता गया। लॉकडाउन से पहले हर माह बैंकिंग फ्रॉड के मामले 60 से 80 के बीच आते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद यह मामले 100 से लेकर 150 तक का आंकड़ा पार गए।
माहौल और लोगों की डिमांड का फायदा उठाते हैं जालसाज : एक्सपर्ट
साइबर ठग माहौल और लोगों की डिमांड के हिसाब से ठगी का ट्रेंड बदलते रहते हैं। कोरोना काल में भी ऐसा देखने को मिला। समय के हिसाब से साइबर ठगों ने लोगों को झांसे में लेकर उन्हें चूना लगाया। वर्तमान में कोरोना वैक्सीन के पंजीकरण के नाम पर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। किसी भी विभाग द्वारा कोई सुविधा ऑन कॉल नहीं दी जाती। अगर किसी के पास ऐसी कोई कॉल आ रही है तो उसे संबंधित विभाग से तस्दीक जरूर कर लें या फिर विभाग की अधिकृत वेबसाइट पर जाकर जानकारी हासिल कर लें। किसी भी अनजान लिंक को क्लिक न करें। ऐसा करने पर खाता खाली हो सकता है।
कर्मवीर सिंह, साइबर एक्सपर्ट, मेरठ जोन पुलिस
फर्जी वेबसाइट बनाकर कोरोना वैक्सीन की सप्लाई के नाम पर साइबर ठगी का ट्रेंड चल रहा। लोगों से पंजीकरण कराने और वैक्सीन मुहैया कराने का झांसा देकर लिंक भेजे जा रहे हैं या खातों में रकम मंगाई जा रही है। ऐसा कोई प्रावधान फिलहाल नहीं है। लिहाजा लोग झांसे में न आएं। किसी भी एप्लीकेशन को बेवजह डाउनलोड न करें। फेंक न्यूज से बचें, क्योंकि ठग पहले वैक्सीन के संबंध में फर्जी न्यूज वायरल कराते हैं। साथ ही किसी अनावश्यक लिंक को क्लिक न करें।
कामाक्षी शर्मा, साइबर इन्वेस्टीगेशन एक्सपर्ट