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नगर निगम की बैठक में सिर्फ वोट डालने आते हैं विधायक-एमएलसी

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नगर निगम की बैठक में सिर्फ वोट डालने आते हैं विधायक-एमएलसी
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गाजियाबाद। विधानसभा सत्र के दौरान नगर निगम की बोर्ड बैठक बुलाए जाने पर भले ही विवाद उठ रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि सांसद, विधायकों और एमएलसी की इन बैठकों में दिलचस्पी ही नहीं रहती। नगर निगम में कार्यकारिणी समिति सदस्यों के चुनाव के लिए बुलाई गई बैठकों को छोड़कर अन्य बैठकों में सांसद, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की उपस्थिति नहीं रही है। जनवरी 2018 से फरवरी 2020 तक हुई बोर्ड बैठकों में भी माननीयों की उपस्थिति ऐसी ही रही है।
17 फरवरी 2020 को हुई नगर निगम बोर्ड की बैठक इसीलिए विवादों में रही कि विधानसभा सत्र चलने की वजह से विधायक और एमएलसी इस बैठक में भाग नहीं ले पाए। उनके विशेषाधिकार का हनन किया गया है। मगर नगर निगम के बैठकों के रिकार्ड को देखे तो अन्य सभी बैठक उस वक्त बुलाई गईं जब न तो लोकसभा का और न ही विधानसभा का सत्र चल रहा था। बावजूद इसके इन बैठकों में लोकसभा सदस्य, विधायक और विधान परिषद सदस्य नहीं पहुंचे।
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क्या कहते हैं बोर्ड बैठक के आंकड़े
23 जनवरी 2018 को नगर निगम की बोर्ड बैठक बुलाई गई, इसमें कोई भी सांसद, विधायक और एमएलसी नहीं पहुंचे। इसके बाद 7 अप्रैल 2018 को निगम की बजट बैठक हुई तो इसमें सिर्फ सपा के एमएलसी जितेंद्र यादव पहुंचे थे। 2 जून 2018 को हुई बोर्ड बैठक में सांसद, विधायक और एमएलसी नहीं पहुंचे। इस बैठक में सिर्फ राज्यमंत्री अतुल गर्ग के प्रतिनिधि अजय राजपूत पहुंचे थे। इसके 9 दिन बाद ही 11 जून 2018 हुई बोर्ड बैठक में जीडीए बोर्ड के चार सदस्यों के रूप में पार्षदों का चुनाव किया गया तो इस बैठक में विधायक सुनील शर्मा, राज्यमंत्री अतुल गर्ग, एमएलसी राकेश यादव, बलवंत सिंह रामूवालिया, केंद्रीय मंत्री वीके सिंह, सांसद अनिल अग्रवाल और विधायक अजित पाल त्यागी पहुंचे थे। इसके बाद 29 सितंबर, 25 अक्तूबर और 24 दिसंबर 2018 को हुई बोर्ड बैठक में से इन पदेन सदस्यों में से कोई भी नहीं पहुंचा। इन बैठकों में शहर के विकास के एजेंडे पर मंथन किया गया था। 23 फरवरी 2019 को नगर निगम कार्यकारिणी समिति के छह सदस्यों के चुनाव के लिए बोर्ड बैठक बुलाई गई। इस बैठक में विधायक सुनील शर्मा, अजित पाल त्यागी, राज्यमंत्री अतुल गर्ग, सांसद वीके सिंह, राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, एमएलसी प्रदीप जाटव और सुरेश कश्यप मौजूद रहे। 7 मार्च 2019 को हुई विकास कार्यों की बैठक और 13 जून को हुई नगर निगम की बजट बैठक में भी कोई पदेन सदस्य नहीं पहुंचे। 13 जून को हुई बजट बैठक में पूरे साल के विकास का खाका खींचा जा रहा था, इसमें भी माननीयों की दिलचस्पी नहीं रही, भले ही वजह कुछ भी रही हो। इसके बाद 18 सितंबर 2019 को हुई बैठक में सिर्फ एमएलसी राकेश यादव पहुंचे थे। 21 सितंबर 2019 में हुई बैठक में सांसद, विधायक और एमएलसी नहीं पहुंचे। इसके बाद बीते माह 8 जनवरी को हुई कार्यकारिणी चुनाव के लिए बैठक में भाजपा विधायक सुनील शर्मा, अजित पाल त्यागी, सांसद वीके सिंह, सांसद अनिल अग्रवाल, एमएलसी बलवंत सिंह रामूवालिया, सुरेश कश्यप, प्रदीप जाटव पहुंचे थे। इसके बाद 27 जनवरी को नवनिर्वाचित पार्षद विकास खारी को शपथ दिलाने के लिए विशेष बैठक बुलाई गई।
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यह है नगर निगम के पदेन सदस्य
सांसद वीके सिंह, राज्यसभा सांसद अनिल अग्रवाल, राज्यमंत्री अतुल गर्ग, विधायक सुनील शर्मा, मुरादनगर विधायक अजित पाल त्यागी और एमएलसी जितेंद्र यादव, राकेश यादव, बलवंत सिंह रामूवालिया, सुरेश कश्यप, प्रदीप जाटव।
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वर्जन
- अभी तक हर बड़ी बोर्ड बैठक में शामिल हुआ हूं। 17 फरवरी की बैठक को लेकर महापौर का फोन आया था, लेकिन उसमें कोई मुख्य एजेंडा नहीं था। इसलिए शामिल नहीं हुआ। बाकी बैठक बुलाए जाने के लिए नियमों का पालन होना चाहिए। - अजीत पाल त्यागी, विधायक मुरादनगर
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- नगर निगम एमएलसी को बोर्ड बैठका का एजेंडा समय से नहीं भेजते हैं। कई बार बैठकों की सूचना भी नहीं दी जाती। इसकी वजह से पार्टी के एमएलसी हो सकता है वहां नहीं पहुंच पाते हो। एजेंडा समय से मिले तो शहर के विकास में अपने सुझाव देने के लिए एमएलसी जरूर नगर निगम बोर्ड बैठक में पहुंचेंगे। - राशिद मलिक, सपा जिलाध्यक्ष
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