एकमुश्त समाधान योजना में ऑफलाइन आवेदन का भी मौका
गाजियाबाद। एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) के तहत छूट का लाभ पाने वालों की कतार में शामिल छोटे बकाएदारों को शासन ने बड़ी राहत दी है। इस योजना में छोटे-बड़े बकाएदार ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन आवेदन कर सकेंगे। 50 लाख से कम के बकाएदारों को शासन ने यह सुविधा प्रदान की है। उधर, योजना का लाभ डिफाल्टर की सूची में आने वाले लोगों को भी मिलेगा। उन्हें ओटीएस के तहत आवेदन का विकल्प दिया गया है।
ओटीएस के लिए नए सॉफ्टवेयर पर शासन स्तर से काम जारी है। छह मार्च से शुरू होने वाली आवेदन प्रक्रिया के साथ ही सॉफ्टवेयर काम करना शुरू कर देगा। छोटे आवेदकों की ऑनलाइन आवेदन करने संबंधी परेशानी को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऑफलाइन विकल्प को शामिल किया गया है। योजना के बाबत जीडीए से अन्य प्राधिकरणों के वित्त नियंत्रकों की लखनऊ में पिछले मंगलवार को बैठक हो चुकी है। बैठक में योजना के तकनीकी व अन्य पहलुओं के बाबत निर्देश दिए हैं। बता दें कि बिल्डरों सहित छोटे-बड़े बकाएदारों पर जीडीए का करीब 800 करोड़ बकाया है। ऐसे में योजना से जीडीए को 400 करोड़ से अधिक आने का अनुमान है। ओटीएस में छोटे-बड़े बकाएदारों को दो फीसदी तक की छूट मिल सकती है। योजना का लाभ लेने के लिए 50 लाख से कम के बकाएदारों को आवेदन और भुगतान के साथ चार माह का वक्त दिया जाएगा। 50 लाख से अधिक के बकाएदारों को आवेदन के साथ भुगतान के लिए सात माह का वक्त दिया जाएगा।
फंड की कमी होगी दूर, विकास योजनाएं पकड़ेंगी रफ्तार
ओटीएस जीडीए के लिए संजीवनी का काम करेगी। इससे जीडीए को करीब 400 करोड़ से अधिक की आय होने का अनुमान है। ऐसे में रुके हुए जीडीए के विकास प्रोजेक्ट रफ्तार पकड़ेंगे। वैशाली से मोहननगर मेट्रो फेज-तीन कॉरिडोर की लागत 1810 करोड़ है। ऐसे में इस कॉरिडोर के लिए फंड जुटाने के लिए माथापच्ची नहीं करनी होगी। वहीं, जीडीए की एनएच-9 को दिल्ली-मेरठ हाईवे से जोड़ने वाले नॉदर्न पेरिफेरल-वे के प्रोजेक्ट में फंड की कमी दूर हो जाएगी। इसके अलावा मधुबन बापूधाम सहित अन्य विकास कार्यों में ओटीएस से मदद मिलेगी।
ओटीएस में छोटे आवेदकों की सहूलियत के लिए ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन आवेदन का विकल्प होगा। ओटीएस का लाभ डिफाल्टरों को भी मिलेगा।
- कंचन वर्मा, उपाध्यक्ष, जीडीए