स्वच्छता पर महापौर और नगरायुक्त में टकराव
गाजियाबाद। शहर में गंदगी और व्यापारियों पर जुर्माना लगाए जाने की कार्रवाई को लेकर महापौर और नगरायुक्त आमने-सामने आ गए हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 की लचर तैयारियों को लेकर महापौर ने भी इस बार गाजियाबाद की रैंकिंग बेहद नीचे खिसकने की आशंका जताई है। उन्होंने निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली को ही कटघरे में खड़ा किया है। महापौर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर सात प्वाइंट को उजागर किया है। मेयर की कड़ी चिट्ठी पर अब मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने डीएम और नगरायुक्त को सफाई में सुधार के निर्देश दिए हैं।
स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू हो चुका है, लेकिन नगर निगम की तैयारी इस बार बेहद कमजोर हैं। महापौर आशा शर्मा ने मुख्यमंत्री को भेजी गई चिट्ठी में कहा है कि स्वच्छता की स्थिति गाजियाबाद में दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। रिहाइशी इलाकों पहले कूड़ा नजर नहीं आता था, अब ढेर लगे रहते हैं। अधिकांश नाले गंदगी से भरे हुए हैं और पार्षद भी इसकी लगातार शिकायत कर रहे हैं। नगर निगम ने पूर्व में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए गाड़ियां लगाई थीं, अब यह गाड़ियां सप्ताह में एक या दो दिन ही कालोनियों में पहुंच रही हैं। महापौर ने कहा है कि गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग करने के नियमों का पालन भी नाम मात्र को हो रहा है। इस संबंध में नगरायुक्त को पत्र भेजे गए हैं, लेकिन उन पर कार्य नहीं हो रहा। महापौर ने कड़ी आपत्ति जताते हुए लिखा है कि 8-9 माह में उन्होंने सुझाव और निर्देश पत्रों के माध्यम से और व्यक्तिगत तौर पर दिए हैं, लेकिन इनमें से न तो किसी पत्र का अधिकारियों ने जवाब दिया और न ही कार्रवाई की। इस मामले पर पूर्व में कार्यकारिणी और बोर्ड बैठक में प्रस्ताव भी पारित हुआ था, 15 दिन में अधिकारियों को जवाब देना था, लेकिन नहीं दिया। सदन की गरिमा का भी सम्मान नहीं किया जा रहा है। शहर के विकास कार्यों की गति बेहद धीमी है और पार्षदों में रोष है। महापौर ने प्लास्टिक के नाम पर जुर्माना करने की आड़ में व्यापारियों से अवैध उगाही किए जाने का आरोप भी अधिकारियों पर लगाया है। इससे व्यापारियों में भी रोष है।
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निगम में दूसरे अधिकारी को भेजने की मांग की
महापौर आशा शर्मा ने शहर की बदहाल स्थिति पर चिंता ही नहीं जताई है, बल्कि शहर की स्वच्छता रैंक बिगड़ने पर उसकी छवि बिगड़ने की भी चिंता जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि गाजियाबाद की दुर्दशा होने से बचाएं और नगर निगम में किसी अन्य सक्षम अधिकारी की तैनात की जाए। उन्होंने कहा है कि स्वच्छ भारत मिशन में गाजियाबाद के रैंक गिरने पर शहर की छवि खराब हो जाएगी। बीते साल गाजियाबाद नगर निगम स्वच्छता की परीक्षा में देश भर में 13वें नंबर और यूपी में नंबर-1 पर था।
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महापौर बोलीं
स्वच्छता के मामले में शहर की स्थिति बदतर होती जा रही है। अधिकारियों को सफाई और कार्यप्रणाली में सुधार के जो निर्देश दिए जाते हैं उनका पालन नहीं हो रहा। मुख्यमंत्री के साथ-साथ नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन, गाजियाबाद के प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना और नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव को भी पत्र भेजकर स्थिति से अवगत कराया गया है। - आशा शर्मा, महापौर