लूट और चोरी के मोबाइलों से ऑनलाइन शॉपिंग करता था गैंग, सरगना गिरफ्तार
गाजियाबाद। लूट व चोरी के मोबाइल के जरिये ऑनलाइन शॉपिंग कर खाता खाली करने वाले गैंग का खुलासा करते हुए साइबर सेल ने सरगना को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी थाना भावनपुर, मेरठ के गांव नगला साहू का रहने वाला शुएब है। उसके कब्जे से लूट व चोरी के 15 मोबाइल बरामद हुए हैं। पुलिस का कहना है कि मोबाइल में मौजूद पेमेंट एप व अन्य डाटा का इस्तेमाल करके गिरोह के सदस्य सिर्फ ऑनलाइन शॉपिंग करते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह में शामिल कुछ अन्य लोग भी ट्रेस हुए हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है।
साइबर सेल के नोडल अधिकारी व सीओ कविनगर अभय कुमार मिश्र ने बताया कि फरवरी में भोजपुर निवासी एक किसान के खाते से करीब तीन लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित ने इसकी शिकायत साइबर सेल में की थी। मामले की जांच करने पर पता चला कि घटना से कुछ दिन पहले ही किसान का मोबाइल भी गायब हो गया था। उस मोबाइल को सर्विलांस पर लगाया गया तो पता चला कि उस मोबाइल में कई सिमों का इस्तेमाल किया गया। काफी मशक्कत के बाद मेरठ केनगला साहू निवासी शुएब ट्रेस हुआ, जिसे शुक्रवार रात गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से लूट व चोरी के 15 मोबाइल बरामद हुए। सीओ का कहना है कि शुएब ने पूछताछ में गैंग में शामिल अन्य सदस्यों के नाम भी बताए हैं। उनके पते तस्दीक कर गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।
एक ही मोबाइल में हो चुका 950 सिमों का इस्तेमाल
सीओ ने बताया कि शुएब के मोबाइल की डिटेल खंगाली तो चौंकाने वाली बात सामने आई। उसके मोबाइल में करीब 950 सिमों का इस्तेमाल किया गया। बरामद मोबाइलों के बारे में शुएब ने बताया कि वह और उसके अन्य साथी दिल्ली के गफ्फार मार्केट से चोरी व लूट के मोबाइल खरीदते हैं और उनके फर्जी बिल बनाकर बेच देते हैं। सीओ का कहना है कि बरामद मोबाइलों के आईएमईआई नंबर रन करा दिए गए हैं। इससे पता चलेगा कि मोबाइल कहां से लूटे व चोरी किए गए हैं।
मोबाइल में मौजूद डाटा का इस्तेमाल करते थे आरोपी
सीओ ने बताया कि लोग अकसर अपने मोबाइल में पेमेंट एप इंस्टाल रखने के साथ-साथ बैंक अकाउंट की जानकारी भी रखते हैं। गैंग के सदस्य मोबाइल के डाटा का इस्तेमाल कर नेट बैकिंग से शॉपिंग, यूपीआई से पेमेंट कर खाता खाली कर देता था। इस टेक्निकल काम की जिम्मेदारी भोजपुर निवासी आरोपी की थी, जो फरार चल रहा है। उसकी गिरफ्तारी के बाद खाते से रकम उड़ाने के अन्य तरीकों का पता चल सकेगा।
झांसा देकर मोबाइल से चुरा लेते थे सिम
सीओ ने बताया कि गैंग के सदस्य मोबाइलों से सिम चुराने का काम भी करते थे। बातचीत करने के बहाने से मोबाइल लेकर वह राहगीरों के मोबाइल से सिम चुरा लेते थे। गिरोह का एक सदस्य राहगीर को बातों में फंसाकर रखता था। किसी भी ट्रांजेक्शन पर रजिस्टर्ड सिम पर ही पिन नंबर आता है, जिसका इस्तेमाल करके भी गैंग खातों से रकम निकाल लेते थे।