बच्चों को स्कूल भेजने केलिए 27556 अभिभावक सहमत
गाजियाबाद। यूपी बोर्ड के कक्षा नौ से 12 तक के स्कूलों को खोलने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने एक सर्वे कराया है। इसमें छात्र-छात्राओं को स्कूल बुलाने के लिए उनसे सहमति मांगी गई है। 66.01 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति जताई है। उन्होंने लिखित में दिया है कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक 66,261 छात्र-छात्राएं पंजीकृत है। इसमें कक्षा नौ में 21,483, कक्षा 10 में 22068 और कक्षा 12 में 22,710 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक रवि दत्त ने बताया कि जिले के 226 स्कूलों के कक्षा नौ से 12 तक पंजीकृत छात्र-छात्राओं के 41,744 अभिभावकों से संपर्क किया गया। इसमें से केवल 27 हजार 556 अभिभावकों ने सहमति जताई है कि वह अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं। बाकी अभिभावकों ने कोरोना संक्रमण के कारण बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर दिया। बताया कि 66.01 प्रतिशत अभिभावक जुलाई से छात्र-छात्राओं को स्कूल भेजना चाहते हैं। उनका मानना है कि 15 महीने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कोरोना संक्रमण के कारण बीच में कुछ समय के लिए ही स्कूल खुले, उसमें भी बीच-बीच में छात्र-छात्राओं को बुलाया गया। ऐसी स्थिति में बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाए। अभिभावकों को लगातार इसका खतरा सता रहा है कि अगर अभी भी स्कूल नहीं खुले तो बोर्ड की परीक्षाओं में बच्चों का रिजल्ट अच्छा नहीं होगा। इसका असर छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ेगा। अभिभावकों का कहना है कि सबसे पहले जान जरूरी है, लेकिन धीरे-धीरे कोरोना की स्थिति सामान्य हो रही है। ऐसी स्थिति में बड़ी कक्षाओं के स्कूल खुलने चाहिए। छोटे बच्चों के लिए स्कूल नहीं खोलने चाहिए। क्योंकि वह बच्चे स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर पाएंगे।
ऑनलाइन कक्षाओं का नहीं मिला लाभ
यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावकों का कहना है कि संसाधनों के अभाव में काफी संख्या में बच्चे ऑनलाइन कक्षाओं का लाभ नहीं ले पाए हैं। बताया कि इंटरनेट की समस्या ग्रामीण क्षेत्र में हमेशा बनी रहती है। इसके अलावा काफी संख्या में ऐसे अभिभावक हैं, जिनकेपास एंड्रॉयड फोन नहीं थे। जिनकेपास मोबाइल थे, उनके अभिभावक अनलॉक होने केकारण ड्यूटी जाने लगे।
बोर्ड की परीक्षा के कारण अभिभावक चिंतित
कक्षा 10 और 12 में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के अभिभावक ज्यादा चिंतित हैं। अभिभावकों का कहना है बच्चों को ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से कई विषय समझ में नहीं आ रहे हैं। आधी-अधूरी पढ़ाई केसाथ बोर्ड की परीक्षा देना उनकेभविष्य केलिए ठीक नहीं है। इसलिए कक्षा नौ से 12 तक के सभी स्कूल खुलने चाहिए।
डीआईओएस रवि दत्त कहते हैं कि शासन के आदेश के बाद जिले के सभी माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों से अभिभावकों का बच्चों को स्कूल बुलाने केलिए सर्वे कराया गया। कक्षा 9 से 12 तक के 66.01 प्रतिशत अभिभावकों ने जुलाई से स्कूल खोलने पर सहमति जताई है। बचे हुए अभिभावकों से भी उनकी राय मांग रहे हैं। उसके बाद रिपोर्ट बनाकर शासन को भेज दी जाएगी।