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डेढ़ लाख पुराने मकानों पर नगर निगम ने खत्म कर दी हाउस टैक्स में छूट

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डेढ़ लाख पुराने मकानों पर नगर निगम ने खत्म कर दी हाउस टैक्स में छूट
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गाजियाबाद। नगर निगम ने बोर्ड में पास हुए प्रस्ताव और नियमों का हवाला देकर शहर में 15 फीसदी हाउस टैक्स तो बढ़ा दिया, लेकिन संपत्ति नियमावली-2000 के नियम-1 के मुताबिक 10 साल से पुराने भवनों को छूट नहीं दी। नगर निगम अधिनियम के मुताबिक 30 मीटर से छोटे भवनों से भी टैक्स नहीं वसूला जाना चाहिए, लेकिन गाजियाबाद में यह छूट भी भवन मालिकों को नहीं मिल रही है। इन प्रावधानों को लागू किया तो शहर के करीब डेढ़ लाख भवन मालिकों को इस छूट का लाभ मिल सकता है। पार्षद अब निगम की आगामी बोर्ड बैठक में हाउस टैक्स बढ़ोतरी के साथ-साथ टैक्स में मिलने वाली छूट के मुद्दे को उठाने की तैयारी कर रहे हैं।
नगर निगम अधिकारियों ने हाल ही में हाउस टैक्स में एक साथ एतिहासिक 15 फीसदी की बढ़ोतरी की है। विपक्षी दल के पार्षद और सत्तादल के विधायक कोरोना संक्रमण काल में की गई इस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे हैं। उनके विरोध के बावजूद नगर निगम ने टैक्स में की गई बढ़ोतरी को लागू कर दिया है। ऐसे में अब जनता को मिलने वाली छूट का लाभ भी दिलाए जाने की कवायद शुरू हुई है। विपक्षी दलों के पार्षदों के साथ-साथ सत्ता दल के भी कई पार्षदों ने अफसरों पर संपत्ति नियमावली 2000 के नियमों को ईमानदारी से लागू न करने का आरोप लगाया है। नियमावली के मुताबिक अगर कोई भवन 10 वर्ष से कम पुराना है तो उसकी एनुअल रेंटल वेल्यू 25 फीसदी, 10 से 20 साल पुराना है तो 32.5 फीसदी और 20 साल से ज्यादा पुराना है तो 40 फीसदी कम मानी जाएगी। नगर निगम बोर्ड ने इस नियम को अभी तक शहर में लागू ही नहीं किया है। यानी हाउस टैक्स के नाम पर भवन मालिकों की जेब से ज्यादा पैसा निकाला जा रहा है।
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करोड़ों में होगी यह छूट
नगर निगम में 10 साल से ज्यादा पुराने भवनों की संख्या करीब डेढ़ लाख से ज्यादा है। किसी भवन की एनुअल रेंटल वेल्यू (एआरवी) एक लाख रुपये है तो 24 फीसदी के हिसाब से उसे फिलहाल 24 हजार रुपये सालाना हाउस टैक्स देना होगा। पुराने भवनों को छूट देने का प्रावधान लागू होने के बाद 20 साल पुराने इस भवन की एआरवी 40 फीसदी कम यानी 60 हजार रुपये सालाना रह जाएगी। इसके बाद इस भवन का हाउस टैक्स घटकर महज 14400 रुपये सालाना रह जाएगा। यानी ऐसे भवन मालिकों को हर साल हाउस टैक्स में 9600 रुपये की बचत होगी। वहीं नगर निगम के मौजूदा छूट के नियम के मुताबिक भवन मालिक फिलहाल अधिकतम 20 फीसदी छूट का लाभ ले सकता है। यानी किसी भवन का सालाना टैक्स अगर 24 हजार है तो वह अधिकतम 4800 रुपये की छूट का लाभ ले सकता है। साफ है कि नगर निगम से जनता को छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।
30 वर्ग मीटर से छोटे भवनों से नहीं लिया जा सकता टैक्स
नगर निगम की संपत्ति कर नियमावली-2000 के मुताबिक ऐसे भवन जो 30 मीटर से कम क्षेत्रफल पर बने हो या किसी भवन का कारपेट एरिया 15 वर्ग मीटर से कम हो तो उनसे हाउस टैक्स नहीं लगाया जाएगा। शहर के नंदग्राम, संजय नगर, तुलसी निकेतन, विजयनगर, वैशाली समेत कई अन्य क्षेत्रों में हजारों की संख्या में ऐसे भवन हैं जो इस छूट के दायरे में आते हैं, लेकिन नगर निगम उनसे भी हाउस टैक्स वसूल रहा है।
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डॉ. संजीव सिन्हा, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी कहते हैं कि नगर निगम की ओर से भवन मालिकों को टैक्स में छूट दी जा रही है। प्रदेश के किसी अन्य नगर निगम में हाउस टैक्स में 20 फीसदी की छूट नहीं दी जा रही है। छोटे भवनों को टैक्स फ्री करने के मामले को दिखवाया जाएगा कि नियम लागू है या नहीं।
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