24 लाख पौधों का हिसाब नहीं, नौ लाख लगाने की तैयारी
गाजियाबाद। चार साल में जिले में 24 लाख 42 हजार 952 पौधे लगाए गए हैं। इनमें से कितने पौधे जीवित हैं, इसकी जानकारी वन विभाग को किसी भी विभाग ने मुहैया नहीं कराई है। हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी देखभाल और परवरिश को लेकर लापरवाही किसी से छिपी नहीं है। हाल में वन विभाग ने अन्य विभागों से उनके द्वारा लगाए गए पौधों की रिपोर्ट मांगी थी लेकिन किसी भी विभाग ने जीवित पौधों की रिपोर्ट नहीं दी है।
प्रदेश सरकार मानसून के सीजन में पौधरोपण का लक्ष्य जिलों को देती है। वन विभाग के आंकड़ों में पिछले चार साल में 24 लाख 42 हजार 952 पौधे रोपे गए हैं। उनके हिसाब से 60 से 70 प्रतिशत पौधे बच जाते हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब 70 प्रतिशत पौधे जीवित हैं तो वह पौधे हैं कहां। बस, आंकड़ों में खेल करके रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिससे शासन और प्रशासन को गुमराह किया जा सके। स्कूलों में रोपे गए 60 प्रतिशत से ज्यादा पौधे मर चुके हैं। सड़कों के किनारे लगे पौधे गायब हैं। साईं उपवन के बाहर जीटी रोड पर लगे पौधे सूख गए हैं। वहीं रोड निर्माण के कारण पेड़ सूखने लगे हैं।
ग्राम्य विकास, जीडीए, नगर निगम को सबसे ज्यादा लक्ष्य
पौधरोपण का सबसे ज्यादा लक्ष्य ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर निगम, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और वन विभाग के पास है। आंकड़ों में सबसे ज्यादा पौधे भी इन्हीं विभागों ने रोपे हैं, लेकिन इनमें से किसी भी विभाग ने वन विभाग को आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए हैं कि उनके पास कितने पौधे जीवित हैं। ऐसे में विभाग के पास कोई ऐसा आंकड़ा नहीं है, जो यह बता सकें कि इतने लाख पौधे जीवित बचे हैं। बस, आंकड़ों में खेल करके 50 से 60 प्रतिशत पौधों को जीवित दिखाकर रिपोर्ट भेज दी जाती है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि उनके पास कोई रिपोर्ट नहीं आई है, जिससे वह चार साल में लगे जीवित पौधों की स्थिति बता सकें।
इस साल 8.90 लाख का लक्ष्य
सभी विभागों को मिलाकर इस बार 8 लाख 90 हजार 511 पौधे रोपने का लक्ष्य मिला है। इस लक्ष्य को मिलाकर पांच साल में 33 लाख 33 हजार 463 पौधे लगाए जाएंगे। इसमें से 24 लाख 42 हजार 952 पौधे लग चुके हैं। लक्ष्य को अगस्त तक पूरा करना है।
नहीं कोई जानकारी
हमारे पास अन्य विभाग के जीवित पौधों की कोई जानकारी नहीं है। हमने दूसरे विभाग को लक्ष्य दिया था, लेकिन वहां से कोई रिपोर्ट जीवित होने की नहीं मिली है।
अशोक कुमार गुप्ता, वन क्षेत्राधिकारी गाजियाबाद