डासना देवी मंदिर में घुसने वाले जीजा-साले को जेल
गाजियाबाद। डासना देवी मंदिर में नाम बदलकर घुसे जीजा-साले से पूछताछ में जांच एजेंसियों को ऐसा कोई सुबूत नहीं मिल सका, जिससे यह साबित हो सके कि वह किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने आए थे। वहीं, मसूरी पुलिस ने शुक्रवार को दोनों आरोपी कोर्ट में पेश किए, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने दोनों को कस्टडी रिमांड पर देने की अर्जी लगाई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के लिए आरोपियों को हिरासत में लेने के लिए दोबारा से कोर्ट में कस्टडी रिमांड की अर्जी लगाई जाएगी।
बुधवार रात करीब साढ़े 8 बजे मसूरी क्षेत्र के डासना देवी मंदिर में दो संदिग्ध अंदर घुस आए थे। गेट पर मौजूद पुलिस केरजिस्टर में एक ने अपना नाम नागपुर निवासी विपुल विजयवर्गीय तो दूसरे ने काशी गुप्ता लिखवाया था। शक होने पर मंदिर के सेवादारों ने पूछताछ की तो काशी गुप्ता नाम का युवक संजयनगर गाजियाबाद निवासी कासिफ निकला। गलत नाम दर्ज कराकर मंदिर में घुसने पर मंदिर महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के करीबी अनिल यादव ने दोनों के खिलाफ तहरीर दी थी। जिसके आधार पर मसूरी पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। कुछ दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने कश्मीर निवासी एक आतंकी को गिरफ्तार किया था, जिसने मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या की योजना का खुलासा किया था। वहीं, मंदिर में पकड़े गए दोनों आरोपियों के बैग से सर्जिकल ब्लेड, उपकरण व आपत्तिजनक दवाईयां मिलने पर बृहस्पतिवार को एटीएस, आईबी व एलआईयू ने भी पूछताछ की थी। हालांकि, उनका कोई आपराधिक इरादा सामने नहीं आ सका। पूछताछ में विपुल और कासिफ जीजा-साले निकले। दोनों ने बताया कि वह शास्त्रार्थ करने के लिए महंत से मिलने आए थे। उनसे बरामद सामान वेक्यूम थैरेपी का बताया गया। शुक्रवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। एसपी ग्रामीण डॉ. ईरज राजा का कहना है कि आरोपियों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। गहनता से पूछताछ के लिए आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए दोबारा से कोर्ट में आर्जी लगाई जाएगी।