फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक लाख घूस देकर मिला बेड, फिर भी नहीं बचा बेटा

विज्ञापन
विज्ञापन
एक लाख घूस देकर मिला बेड, फिर भी नहीं बचा बेटा
विज्ञापन

केस-1
बालाजी एंक्लेव में रहने वाले मास्टर मनोज नागर का बड़ा बेटा कोरोना संक्रमण की चपेट में आया। तबीयत खराब होने पर अप्रैल के अंत में उसे हरियाणा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ। तीन से चार दिन चक्कर काटने के बाद उन्हें चार मई को एक दलाल मिला, जिसने भरोसा दिया कि एक लाख रुपये लेकर वो वसुंधरा सेक्टर-15 के एक अस्पताल में भर्ती करा देगा। रिश्वत देकर बेड का इंतजाम हुआ, लेकिन चार दिन के बाद 8 मई की सुबह बेट की मौत हो गई। अस्पताल ने 2.5 लाख रुपया बिल बनाया। ट्रीटमेंट के दौरान दो यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया था, उसका इंतजाम भी परिवार के लोगों ने अलग से किया था।
केस-2- डूडाहेड़ा निवासी कुलभूषण त्यागी के पिता नरोत्तम सिंह त्यागी 22 अप्रैल को कोरोना संक्रमित हुए। इसके बाद निजी चिकित्सक की निगरानी में उनका इलाज चलता रहा, लेकिन 28 अप्रैल को उनके पिता की तबीयत बिगड़ी तो नेहरू नगर के निजी अस्पताल में लेकर पहुंचे, लेकिन वहां पर बेड खाली नहीं था। उसके बाद संयुक्त जिला अस्पताल संजय नगर लेकर पहुंचे। शाम साढ़े चार बजे गंभीर स्थिति में उन्होंने अपने पिता को अस्पताल में बड़ी जद्दोजहद से भर्ती कराया, लेकिन उसके बाद कोई इलाज नहीं मिला। साढ़े सात बजे स्टाफ नर्स ने इंजेक्शन लगाया, लेकिन उससे पहले किसी डॉक्टर ने नहीं देखा। रात के नौ बजे उनके पिता की मौत हो गई। कुलभूषण त्यागी के आरोप है कि ऑक्सीजन न मिलने से मेरे पिता की मौत हुई। इस मामले में हत्या का मुकदमा अस्पताल और चिकित्सकों पर दर्ज हो।
विज्ञापन

माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। कोरोना की दूसरी लहर में अस्पताल में बेड दिलाने के नाम पर वसूली हुई है। अस्पतालों ने भी मनमाना बिल लिया है। अस्पतालों की वसूली की जांच जिला स्तर पर दो कमेटियां कर रही हैं। एक कमेटी नगरायुक्त की अध्यक्षता में अस्पतालों के बिलों की जांच कर रही है तो दूसरी कमेटी अपर नगर मजिस्ट्रेट विनय सिंह की अध्यक्षता में बनी है। यह पीड़ित परिवारों की तरफ से दी जा रही शिकायतों पर जांच कर रही है। अब जांच शुरू होने की खबरें बाहर आई तो दूसरी लहर में पीड़ित रहे परिजनों ने मोर्चा खोल दिया है। लगातार शिकायतों का सिलसिला बढ़ रहा है। कुछ शिकायतें गंभीर आरोपों की हैं, जिनमें पीड़ित परिवारों ने सीधे अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है।
अब बिलों के साथ में कालाबाजारी से जुड़ी शिकायतें भी पहुंच रही है। यहां तक की संयुक्त अस्पताल के ऊपर भी डूडाहेड़ा निवासी कुलभूषण ने संगीन आरोप लगाए हैं। डीएम, एसएसपी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के नाम से की गई शिकायत में 28 अप्रैल को अपने साथ हुई पूरी घटना का बिंदुवार उल्लेख किया है। तीन पेज की शिकायत में कहा गया कि शाम साढ़े चार बजे अपने दोस्तों के साथ पिता को भर्ती कराने के लिए पहुंचा। पहले वहां पर कह दिया गया कि बेड खाली नहीं है। उसके बाद जब उसने भरे हुए बेड़ों के बारे में पूछा गया तो भर्ती कर लिया गया, लेकिन एक स्टाफ में अलग कमरे में ले जाकर कहा कि अपने फोन बंद कर और यह बताओ तुम्हें यहां खाली बेड़ किसने बताया। कितने पैसे देकर बेड मिला है। इसके बाद अस्पताल में ऑक्सीजन नहीं मिली। बाहर से अपना अलग सिलिंडर लेकर आना पड़ा, लेकिन उसमें भी ज्यादा ऑक्सीजन नहीं थी। शाम के साढ़े सात बजे बिना मरीज का बीपी, पल्स व ऑक्सीजन लेबल देख एक स्टॉफ नर्स ने इंजेक्शन लगा दिए। वहां पर मौजूद डॉक्टर के हाथ जोड़कर अनुरोध करता रहा लेकिन किसी ने नहीं देखा। कुलभूषण का आरोप है कि शाम साढ़े सात बजे ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर गाड़ी पहुंची तो सभी मरीजों के तीमारदार लाइन लगाकर खड़े हो गए। मुझे बताया गया कि यहां अपना अलग से ऑक्सीजन सिलिंडर लेना होगा। उसके बाद मैं और मेरा दोस्त गाड़ी के पास ऑक्सीजन लेने पहुंचे तो उन्होंने कहा कि सिर्फ उन्हीं को मिलेगी जिन्हें डॉक्टर ने स्वीकृति दी है। सीधे तौर पर सरकार की तरफ से भेजी जा रही ऑक्सीजन को संयुक्त अस्पताल में बेचा गया। रात के वक्त पाइप से सप्लाई होने वाले ऑक्सीजन बंद कर दी गई। बहुत चिल्लाने के बाद ऑक्सीजन सप्लाई खोलनी गई लेकिन तब तक पिता की जान चली गई।
वर्जन
- अस्पताल में भर्ती कराने के लिए दलाल के माध्यम से एक लाख की घूस ली गई। उसके बाद चार दिन तक वसुंधरा के अस्पताल में भर्ती रहा लेकिन वहां पर कोई इलाज नहीं मिला। चार दिन में 2.50 लाख रुपया का अलग से बिल लिया। जबकि दवाएं व अन्य जरूरी सामान बाहर से मंगाया गया। अब मैं अस्पताल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करवाऊंगा। - मास्टर मनोज नागर, पीड़ित एवं महासचिव भाकियू भानु
विज्ञापन

सर्वोदय ने लौटाए 38 हजार रुपये
प्रशासन की तरफ से जांच कर रही कमेटी को शिकायत मिलने के बाद सर्वोदय अस्पताल कविनगर ने एक पीड़ित के 38 हजार रुपये लौटाए हैं। अपर नगर मजिस्ट्रेट विनय सिंह का कहना है कि 20 से अधिक शिकायतों पर नोटिस दिया गया है। इनमें से कुछ का जवाब मिला है, लेकिन वो संतोषजनक नहीं है, जिस पर आगे की जांच की जा रही है। बाकी अस्पतालों ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें