कोरोना ने विकास कार्यों पर लगाए ब्रेक, शहर की 3 योजनाएं लटकीं
गाजियाबाद। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन, नगर निगम के पहले ऑडिटोरियम की सौगात के लिए अब शहर के लोगों को और इंतजार करना होगा। इनके अलावा नंदग्राम में बनने वाले देश के पहले राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र का प्रोजेक्ट की रफ्तार पर भी कोरोना कर्फ्यू का ब्रेक लग गया है। हालांकि अब धीरे-धीरे इनके निर्माण कार्य की मॉनीटरिंग शुरू हुई है, इलेक्ट्रिक बस में सफर करने का लोगों का सपना अब अक्तूूबर से पहले पूरा नहीं हो पाएगा।
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मई में थी इलेक्ट्रिक बसें दौड़ाने की योजना यूपी सरकार ने पहले मार्च 2021 तक और फिर मई 2021 तक 50 इलेक्ट्रिक बसें गाजियाबाद में दौड़ाने की प्लानिंग की थी। इसके लिए नगर निगम ने बीते साल ही बसों के डिपो के लिए जमीन चिह्नित कर ली थी और कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस को सौंप दी थी। करीब 14 करोड़ की लागत से विजयनगर क्षेत्र के अकबरपुर-बहरामपुर में इलेक्ट्रिक बसों का डिपो और चार्जिंग स्टेशन बनाए जाने हैं। सीएंडडीएस ने 30 अप्रैल 2021 तक सिविल वर्क पूरा करने का दावा किया था। इसके बाद मई में यहां बसों का संचालन शुरू होना था। इन बसों के लिए रूटों का चयन भी हो चुका है। नगर आयुक्त की अध्यक्षता वाली कमेटी बसों के 12 रूटों को तय कर चुकी है। अब कोरोना संक्रमणकाल में लेबर और सामानों की आपूर्ति में बाधा बनी तो इस प्रोजेक्ट की रफ्तार पर भी असर पड़ा। अभी तक बसों का डिपो भी बनकर तैयार नहीं हो पाया है। नगर आयुक्त ने सीएंडडीएस के अधिकारियों को बाकी काम जल्द ही पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
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अप्रैल में होना था नगर निगम के ऑडिटोरियम का लोकार्पण
नगर निगम करीब 32 करोड़ की लागत से नेहरू नगर द्वितीय में अपने पहले ऑडिटोरियम का निर्माण करा रहा है। वर्ष 2012 में प्रस्ताव पास होने के बाद इस ऑडिटोरियम का निर्माण शुरू कर दिया गया था, करीब 20 बार इसका निर्माण पूरा होने की तारीख तय की गई, लेकिन समय पर पूरा नहीं हो पाया। कई बार एस्टिमेट में बदलाव हुआ। शुरूआत से विवादों में रहे इस ऑडिटोरियम का नक्शा भी बीते साल तत्कालीन नगर आयुक्त दिनेश चंद्र सिंह के कार्यकाल में जीडीए से पास कराया गया। इसके बाद 860 लोगों की क्षमता वाले और पूर्णत: वातानुकूलित इस ऑडिटोरियम का लोकार्पण अप्रैल 2021 में करने का लक्ष्य तय किया गया, लेकिन मई में भी इसका लोकार्पण नहीं हो पाया। निगम अधिकारियों का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू की वजह से दिल्ली की एजेंसी की ओर से फायर फाइटिंग सिस्टम को लगाने में देरी हुई। श्रमिकों की कमी की वजह से निर्माण की रफ्तार धीमी हो गई। हालांकि 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है अब जून के अंतिम सप्ताह तक इसका लोकार्पण कराने की तैयारी की जा रही है। इस ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक और सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन हो सकेगा। शहर की जनता भी इसमें कार्यक्रम आयोजित कर सकेगी।
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राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र का काम भी अटका
नंदग्राम में देश का पहला राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र बनाया जा रहा है। पहले चरण में इस प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण पर 168 करोड़ और दूसरे चरण में करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। नगर निगम ने राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण के लिए करीब 51 हजार वर्ग मीटर जमीन दी है। इसके निर्माण की जिम्मेदारी भी जल निगम की सीएंडडीएस इकाई को दी गई। करीब दो साल पहले ही राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण के लिए रुड़की आईआईटी के इंजीनियरों की टीम यहां मिट्टी का परीक्षण कर चुकी है। इसमें 1200 लोगों की क्षमता वाले ऑडिटोरियम के अलावा, एक एडमिन ब्लॉक और दो एकेडमिक ब्लॉक बनाए जाने हैं। सात मंजिला हॉस्टल पुरुषों के लिए और दो मंजिला महिलाओं के लिए बनाया जाना है। वीवीआईपी के लिए 16 सूट्स बनाए जाने हैं। ढाई साल में यह बनकर तैयार होना था। जमीन मिलने के बावजूद कोरोना कर्फ्यू के कारण यहां काम धीमा हो गया है। ऐसे में इसका निर्माण भी अब तय समय पर पूरा नहीं हो पाएगा।
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सीएंडडीएस को दिए काम पूरा करने के निर्देश
इलेक्ट्रिक बस संचालन के लिए नोडल विभाग नगर निगम को बनाया गया है। नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने दो दिन पहले ही अकबरपुर-बहरामपुर में बन रहे बस डिपो का निरीक्षण किया। उन्हें यहां कई खामियां मिलीं। नगर आयुक्त ने बताया कि कार्य की गुणवत्ता सही न पाए जाने पर उन्होंने सीएंडडीएस के अधिकारियों को सात दिन में सुधार करने और बकाया काम को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सात दिन बाद फिर से इसका निरीक्षण करेंगे। जऱ्ल्द ही सिविल वर्क पूरा क लिया जाएगा।
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नेहरू नगर में बन रहे ऑडिटोरियम का काम अब अंतिम चरण में है। लिफ्ट और फायर फाइटिंग सिस्टम का ट्रायल शुरू हो गया है। कोरोना कर्फ्यू की वजह से कई काम लेट हो गए हैं। जून में इसका लोकार्पण हो जाएगा। शहर की जनता को नगर निगम बड़ी सौगात देगा। - मोइनुद्दीन खान, मुख्य अभियंता, नगर निगम