एंबुलेंस चालकों ने की अवैध वसूली, दो गिरफ्तार
गा जियाबाद। एंबुलेंस चालकों की तरफ से मरीजों से अवैध वसूली का खेल जारी है। डीएम अजय शंकर पांडेय को मिली शिकायत पर मरीज बनकर अधिकारियों ने जांच की तो सारा खेल पकड़ा गया। साधारण एंबुलेंस से मरीज को गाजियाबाद से बरेली छोड़ने के लिए 22 से 24 हजार मांगे गए। मरीज बने अधिकारियों ने हवाला भी दिया कि जिले में तय रेट (50 रुपये प्रति किलोमीटर) के हिसाब से 12 हजार ही बनते हैं, लेकिन इस पर एंबुलेंस चालक नहीं माने। इसके बाद 22 हजार में बुकिंग तय कर यादव एंबुलेंस सर्विस और साईं एंबुलेंस सर्विस से दो एंबुलेंस को मंगवाया गया। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, इस मामले में डीएम ने आगे की जांच भी बैठा दी है।
बृहस्पतिवार को डीएम को फोन के जरिए शिकायत मिली कि एंबुलेंस चालक प्रशासन की तरफ से तय दरों से करीब दोगुनी कीमतें वसूल रहे हैं। शिकायत पर डीएम ने अपर नगर मजिस्ट्रेट खालिद अंजूम व अन्य को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। इसके बाद खालिद अंजूम ने मरीज का तीमारदार बनकर साईं एंबुलेंस सर्विस को फोन किया कि हमारा मरीज लोहिया नगर के एक अस्पताल में भर्ती है जो अब स्वस्थ हो चुका है। उसकी छुट्टी हो गई है और उसे बरेली तक छोड़ना है। इस पर एंबुलेंस चालक ने 24 हजार मांगे। एसीएम ने हवाला दिया कि यह तो काफी ज्यादा है। हमनें तो कुछ दिन पहले अखबार में पढ़ा था कि साधारण एंबुलेंस प्रति किलोमीटर 50 रुपये और दूरी दस किलोमीटर से अधिक है तो एक हजार रुपये अतिरिक्त चार्ज कर सकती है। इस पर एंबुलेंस सर्विस की तरफ से कहा गया कि हमें आदेश का पता नहीं है। आपके लिए एक दाम 22 हजार रुपये लगेंगे, इससे कम नहीं। इसके बाद एसडीएम ने कहा कि ठीक है तो आप लोहिया नगर गुरुद्वारे के पास एंबुलेंस भेज दो। कुछ देर के बाद एंबुलेंस पहुंचे तो चालक को गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह से यादव एंबुलेंस सर्विस को कॉल करके डीलिंग की गई। उसने भी दोगुने रेट मांगे और उसकी भी एक एंबुलेंस को बुलाकर चालक को गिरफ्तार कर लिया। इस दौरान मौके पर एआरटीओ, यात्री कर अधिकारी व पुलिस टीम को भी बुला लिया गया।
11 एंबुलेंसों की जांच के आदेश
एसीएम ने जांच में पाया है कि दोनों एंबुलेंस सर्विस के पास 11 गाड़ियां हैं। इसमें से कई गाड़ियों का आरटीओ दफ्तर में एंबुलेंस के तौर पर रजिस्ट्रेशन नहीं है। बल्कि उन्हें मोडीफाइ करके एंबुलेंस बनाया गया। इसलिए सभी एंबुलेंस की जांच होगी। एंबुलेंस सर्विस के रेट तय होने के बाद उन्होंने कितनी मरीजों को छोड़ा। उन सभी को फोन करके जांच की जाएगी कि कितना चार्ज लिया गया। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के संबंध में डीएम ने अलग से आदेश दिए हैं।