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फोन करने पर भी नहीं मिला वेंटिलेटर, महिला की मौत

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फोन करने पर भी नहीं मिला वेंटिलेटर, महिला की मौत
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गाजियाबाद। कोविड संक्रमितों को इलाज के सरकारी दावे फेल हो रहे हैं। कंट्रोल रूम से लेकर अधिकारियों तक को फोन करने पर भी वेंटिलेटर न मिलने से कांशीराम आवासीय योजना में रहने वाली एक महिला की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में बेड दिलाने और ऑक्सीजन दिलाने के लिए भी उनसे सुविधा शुल्क लिया गया। सामाजिक संस्था चलाने वाली व कांग्रेस महिला विंग की पूर्व जिलाध्यक्ष ममता सिंह ने इस महिला का दर्द सोशल मीडिया पर बयान किया है।
कांशीराम आवासीय योजना में रहने वाली सुनीता (47) चाय की दुकान चलाती थीं। बुखार आने पर तीन मई को सुनीता की हालत बिगड़ी तो पति सुंदरलाल और अन्य परिजन उन्हें एमएमजी अस्पताल ले गए। आरोप है कि यहां उन्हें बेड नहीं मिला। मिन्नतें करने पर एक कर्मचारी ने बेड दिलाने के नाम पर 5 हजार रुपये मांगे। असमर्थता जताने पर 15 सौ रुपये में बेड मिला। परिजनों के मुताबिक हालत बिगड़ने पर ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी तो अस्पताल के कर्मचारियों ने इसके लिए भी अलग से सुविधा शुल्क लिया। हालात में सुधार न हुआ तो वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। सुनीता को वेंटिलेटर बेड दिलाने के लिए न सिर्फ परिजनों ने बल्कि कांग्रेस की पूर्व महिला जिलाध्यक्ष व सामाजिक संस्था आनंद सेवा समिति की संचालक ममता सिंह ने भी सोशल मीडिया के जरिए मदद मांगी। सुनीता के पति और बेटियों ने कंट्रोल रूम से लेकर अधिकारियों तक के फोन पर कॉल की, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली। आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से वह महंगे प्राइवेट अस्पताल में भी उन्हें बेड न दिया गया। सरकारी हेल्पलाइन भी सुनीता की हेल्प न कर सकी और वेंटिलेटर बेड और सही इलाज न मिलने पर सुनीता ने दम तोड़ दिया। सुनीता के परिजनों का कहना है कि उन्हें सही समय पर इलाज मिला होता तो वह जिंदा होती।
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सरकारी स्तर से लोगों को इलाज दिलाने के दावे झूठे हैं। सुनीता की मौत सामान्य मौत नहीं है। इसके लिए सरकारी सिस्टम के अधिकारियों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज होना चाहिए। गरीब लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है और बड़े अधिकारियों को तुरंत बड़े अस्पताल में बेड मिल जाता है। - ममता सिंह, एनजीओ संचालक
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