बोले श्रमिक : जब टिकट के लिए मिल रहे पैसे तो क्यों न जाएं घर
गाजियाबाद। नौकरी के लिए गांव से शहर में प्रवासी श्रमिकों की तवज्जो पंचायत चुनाव के दौरान बढ़ गई है। पंचायत चुनाव में उतरे प्रत्याशियों के लिए ये श्रमिक वोट हैं। इन्हें लुभाने और बुलाने में वह कमी नहीं छोड़ रहे। वोट डालने के लिए वह उन्हें बुला रहे हैं। बस और ट्रेन का किराया दिया जा रहा है। दिहाड़ी का नुकसान नहीं होगा इसका भी इंतजाम किया जा रहा है। श्रमिकों का कहना है कि जब मुफ्त में उन्हें घर जाने को मिल रहा है वह क्यों न जाएं? इससे उद्योगों के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। करीब 20 प्रतिशत उत्पादन घट गया है। उद्यमियों को डर है कि महामारी के दौर में श्रमिक गांव में रुक गए तो उत्पादन और कम हो जाएगा।
जिले में 27 हजार उद्योग हैं और इनमें करीब साढ़े तीन लाख श्रमिक काम करते हैं। इनके अलावा निर्माणकार्य करने वाले श्रमिकों की संख्या भी एक लाख से ज्यादा है। इनमें बड़ी तादाद यूपी के विभिन्न जिलों से आने वाले श्रमिकों की है। गाजियाबाद में आकर रोजी रोटी कमा रहे बिरजू, सुंदर, सरला जैसे नाम भी प्रत्याशियों ने गांव के चुनाव में जीत-हार के गणित में शामिल कर लिए हैं। छह-सात वोटर एक साथ होने पर गाड़ी भेजने, दो-तीन वोट पर यात्रा का टिकट और हर दिन की दिहाड़ी देने का ऑफर श्रमिकों को दिया गया है। गाजियाबाद जिले से अब तक करीब 40 फीसदी श्रमिक चुनाव के चलते घर वापसी कर चुके हैं, जबकि बड़ी संख्या में श्रमिक घर जाकर अपने गुट के प्रत्याशी को चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। श्रमिकों का भी मानना है कि रोजी रोटी तो चलती ही रहेगी, पांच साल बाद आने वाला चुनाव भी जरूरी है। शहर में मेहनत करके अपने परिवार का भविष्य लिख रहे हैं तो पंचायत चुनाव में मतदान करके गांव का भविष्य भी संवार लें। श्रमिकों की कमी से जिले के उद्योगों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। उद्योगों में करीब 20 फीसदी उत्पादन घट चुका है। खासतौर से मशीनरी पार्ट्स तैयार करने वाली इंडस्ट्री को अब श्रमिकों की वापसी का इंतजार रहेगा।
प्रतिदिन 450 करोड़ का कारोबार होता है गाजियाबाद में
गाजियाबाद में लोहे और स्टील से बने यांत्रिकी उत्पादों को तैयार करने में प्रति उद्योग 40 से 50 श्रमिक लगते हैं। ऐसे में कुछ उद्योगों में श्रमिकों की संख्या घटकर आधी रह गई है। प्रतिदिन 450 करोड़ का उत्पादन अब 300 से 350 करोड़ का रह गया है। खासकर मशीनरी पार्ट्स की इंडस्ट्री में माल की लोडिंग और अनलोडिंग के लिए श्रमिकों की किल्लत होने लगी है।
मैं कासगंज जिले के डुकरिया का नगला निवासी हूं। गांव में चुनाव के लिए घर जाना है। आने-जाने का इंतजाम गांव से ही किया जा रहा है। जल्द ही गांव लौट जाऊंगा और चुनाव बाद वापस आऊंगा।
- विजयपाल, श्रमिक
मैं बुलंदशहर औद्योगिक क्षेत्र में कार्य करता हूं। 19 अप्रैल को लखीपुर खीरी में होने वाले मतदान के लिए घर जाने की तैयारी कर रहा हूं। कई बार बुलावा आ चुका है।
- राजू, श्रमिक
मैं अपने परिवार के साथ 16 तारीख को बदायूं जाऊंगी, घर से गाड़ी करके लोग आएंगे तो यहां से हम सब परिवार के साथ रवाना होंगे।
- सरस्वती, श्रमिक
मैं वॉशिंग पाउडर बनाने वाली फैक्ट्री में काम करती हूं। हमारे रिश्तेदार चुनाव लड़ रहे हैं। इसके लिए कल अपने परिवार के साथ ललितपुर जाऊंगी। मतदान करने के बाद लौट आएंगे।
- रेखा, श्रमिक
हमारी इंडस्ट्रियल कैमिकल बनाने की फैक्ट्री है। करीब सात से आठ श्रमिकों ने छुट्टी के लिए अर्जी दे दी है। ऐसे में लगभग अप्रैल माह के आखिर तक उत्पादन प्रभावित रहेगा।
- डीके गुप्ता, महासचिव, साउथ साइट जीटी रोड औद्योगिक क्षेत्र
कविनगर औद्योगिक क्षेत्र में मेरी ऑटो पार्ट्स की इंडस्ट्री है। श्रमिकों की बात की जाए तो पूरे क्षेत्र में करीब 35 फीसदी श्रमिक चुनाव में गए हैं। कुछ इंडस्ट्री में श्रमिक छुट्टी के लिए लगातार मांग कर रहे हैं।
- नंदलाल शर्मा, उद्यमी कविनगर औद्योगिक क्षेत्र